Monday, 12 August 2024

रिमझिम बरसे पानी

‎बाल कविता

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‎रिमझिम बरसे पानी 

‎

‎हेम के चौपाई छंद

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‎रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी।

‎चम-चम चमके बिजुरी रानी।।

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‎कड़-कड़ कड़के बादल भैया।

‎नाचय मछरी ता-ता थैया।।

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‎छाय घटा हे करिया-करिया।

‎भर जाहीं सब नरवा-नदिया।।

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‎होके मगन मयूरी नाचय।

‎सबो परानी मन हरसावय।।

‎

‎टर्र-टर्र मेढ़क नरियावय।

‎पानी पाके उछलत जावय।।

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‎छाही जग मा अब हरियाली।

‎देख केकड़ा पीटत ताली।।

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‎बरखा देवय नव जिनगानी।

‎हरियर होवय धरती रानी।।

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‎रचनाकार : हेमलाल साहू

‎ग्राम : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)

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