बाल कविता
रिमझिम बरसे पानी
हेम के चौपाई छंद
रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी।
चम-चम चमके बिजुरी रानी।।
कड़-कड़ कड़के बादल भैया।
नाचय मछरी ता-ता थैया।।
छाय घटा हे करिया-करिया।
भर जाहीं सब नरवा-नदिया।।
होके मगन मयूरी नाचय।
सबो परानी मन हरसावय।।
टर्र-टर्र मेढ़क नरियावय।
पानी पाके उछलत जावय।।
छाही जग मा अब हरियाली।
देख केकड़ा पीटत ताली।।
बरखा देवय नव जिनगानी।
हरियर होवय धरती रानी।।
रचनाकार : हेमलाल साहू
ग्राम : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
No comments:
Post a Comment