Sunday, 16 August 2026
विष्णु पद छंद नोनी बाल कविता
मंगला चरण
Saturday, 15 August 2026
अपन देस बर जीबो मरबो (हेम के सरसी छंद)
हेम के कुकुम्भ छंद अमर सिपाही बाल कविता
Monday, 3 August 2026
गरमी मा आथे आमा चौपाई छंद
Sunday, 2 August 2026
आइस मौसम जाड़ा*
हमला दवँ वरदान(हेम के सरसी छंद)
Saturday, 1 August 2026
हेम के सरसी छंद *मया के डोर*
बरखा रानी के रंग (हेम के सार छंद)
Sunday, 26 July 2026
मुसवा-बिलई के लड़ई
हेम के हास्य कविता — "बिक्कट भुलहा बबा"
Friday, 24 July 2026
बरखा रानी के नखरा
हेम के दोहे (बाल जनऊला–10)
हेम के दोहे (बाल जनऊला–9)
हेम के दोहे (बाल जनऊला–9)
मुँह दाँत जीभिया नहीं, काया पोंडा होय।
फूँक देत ता राग दे, बिना फूँक चुप सोय।।
ऊपर हे झबरा जटा, काया कठुआ पोठ।
कारी आँखी तीन ठन, भीतर गूदा रोठ।।
पानी दाना खाय नइ, पखना के जे पूत।
टकरावत चिनगी झरे, सुलगा देवय सूँत।।
उज्जर काया खोखला, फूँक परत हुंकार।
मंदिर भर गूँजत उठय, मंगल करत पुकार।।
दू अँगरी हे एक मुँह, चलथे एक्के साथ।
दहकत धरके अंगरा, मनखे बचाय हाथ।।
कुआँ नहीं पानी झरे, घाम काम ले गार।
पीये कोनो जन नहीं, हवा पाय ले हार।।
चलय नहीं दौड़य नहीं, बिना पाँव पहुँचाय।
गाँव-शहर ला जोड़ के, जग ला छोट बनाय।।
डिक्टो मनखे कस लगे, फेर चले ना साँस।
पहिरे फटहा कोट ला, काया लउठी बाँस।।
दुरिहा जावय पाँव बिन, संदेसा पहुँचाय।
ओकर मुँह नइहे तभो, जम्मो बात बताय।।
करिया धूसर रूप धर, भागत चढ़य अगास।
आँखी मा पानी भरे, खांसत निकले साँस।।
उत्तरमाला
🎶 बंसी (बासुरी)• 🥥 नरियर (नारियल )• 🪨 चकमक • 🐚 शंख • 🔥 चिमटा • 💦 पसीना • 🛣️ रद्दा (सड़क )• 🌾 पुतला • ✉️ पाती (चिट्ठी )• 🌫️ धुआँ
रचनाकार -हेमलाल साहू
चिरई के गाँव - गिधवा, जिला-बेमेतरा
🌼 हेम के दोहे (बाल जनऊला–8) 🌼
Thursday, 25 June 2026
हेम के दोहे (बाल जनऊला–7)
Wednesday, 24 June 2026
हेम के दोहे (बाल जनऊला–6)
Tuesday, 23 June 2026
🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟
🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟
कागज उप्पर नाचके, पोकय मस के लीक।
अपन पेट खाली करे, नाव बतालव ठीक।।
हरियर लुगरा ओढ़ के, ठाड़े दिन अउ रात।
जेठ घाम मा छाँव दे, सबके करय सहात।।
रतिहा फूलय डार मा, टप टप झरय बिहान।
महर महर ममहाय ले, दुरिहा ले पहिचान।।
एक पेड़ सीधा खड़े, छूये जाय अगास।
दुब्बर पातर ये रहे, आवय कामें खास।।
झब्बू पूँछ उठाय के, कूदय नाचय डार।
करिया धारी पीठ मा, करथे चिर्र-पुकार।।
काया हरियर रंग के, टप-टप कूदत जाय।
पानी गिरथे सनसना, टरर-टरर नरियाय।।
धरती भीतर घर करे, मुँह ऊपर हे खोल।
प्यासा आके तीर मा, पानी पाय अमोल।।
काया हरियर लाल मुख, गुरतुर बोली बान।
मनखे जइसन गोठिया, बूझव नाम सुजान।।
रंग बिरंगी पाँख ले, फूल फूल मंडराय।
रस चूसे मुँह नानकुन, घूम घूम इतराय।।
पानी भीतर घर करे, बिन पानी मर जाय।
आँखी खोले रात दिन, पलक नहीं झपकाय।।
उत्तरमाला : कलम 🖋️ | रुख (पेड़)🌳 | महुआ 🌼 | बाँस 🎋 | गिलहरी 🐿️ | मेचका (मेढ़क)🐸 | कुँआ 💧 | मिट्ठू (तोता)🦜 | तितली 🦋 | मछरी (मछली)🐟
रचनाकार – हेमलाल साहू
चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
Monday, 22 June 2026
हेम के दोहे (बाल जनऊला 4)
🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟
Saturday, 20 June 2026
हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)
हेम के दोहे (बाल जनऊला-1)
Wednesday, 17 June 2026
खेलँय संगी (चौपाई छंद)
Saturday, 13 June 2026
जुगनू राजा
Friday, 5 June 2026
साइकिल
पहली रहिस साइकिल, घर के शान।
रहय अपन घर के ओ, बन पहिचान।।
दीदी नोनी बाबू, सबो सियान।
दाई बबा चलावय, सबो जवान।।
कम खर्चा पानी मा, चलय गुजार।।
दौड़य गली खोर अउ, सब संसार।।
ट्रिन ट्रिन बजाय घंटी, देय धियान।
लान साइकिल लेवय, काम किसान।।
पगडंडी मा भागय, बड़ रफ्तार।
गाँव शहर ला घूमे, पैडिल मार।।
एक एक पैडिल के, खूब धमाल।
तोर बना सेहत ला, करय कमाल।।
डीजल तेल के नहीं, बनय गुलाम।
मिहनत बदला सेहत, मिलय इनाम।।
बिना प्रदूषण दौड़ा, इहि जग सार।
चला साइकिल करलव, मया दुलार।।
रचनाकार - हेमलाल साहू
Sunday, 31 May 2026
हेम के कुण्डलियाँ (सच)
सच बोली मा रूठथे, झूठन जग पतियाय।
पर हेमलाल सच कहे, चाहे जिवरा जाय।।
चाहे जिवरा जाय, साँच बोली सुखदाई।
झूठ लबारी तोर, कभू टीकय ना भाई।।
गुनके चुनके बोल, लगालव सच के चोली।
अपने स्वारथ छोड़, सदा सच बोलव बोली।।
- हेमलाल साहू
Wednesday, 27 May 2026
*सीखव गिनती*
सीखव गिनती
आवव संगी सीखव गिनती।
मुनिया बबलू करथे बिनती।।
एक मया के ममता दाई।
दूध पान मा हवय भलाई।।
दू आँखी ले देखे मुनिया।
रंग बिरंगी हावय दुनिया।।
तीन रंग मा सजे तिरंगा।
देश प्रेम अउ हे मन चंगा।।
चार मास के बरसा पानी।
गाँव-गाँव मा करे किसानी।।
पाँच उंगरी एक हथेली।
मया-दया ला बाँट सहेली।।
छह ऋतु आवय बारी-बारी।
अपन रंग ले धरती सारी।।
सात सुरों मा गीत बनालव।
पेटी तबला संग बजालव।।
आठ पाँव के मकड़ी रानी,
जाल बुनय सारी जिनगानी।।
नौ दुवार के हावय काया।
बसथे उहाँ मोह अउ माया।।
दस उँगरी दू हाथ लगालव।
एक संग ले काम करालव।।
गिनती सीखव ज्ञान बढ़ावव।
पढ़-लिख के जिनगी चमकावव।।
-हेमलाल साहू
गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा
विष्णु पद छंद नोनी बाल कविता
विष्णु पद छंद नोनी बाल कविता हमरो घर के नोनी हावय, अड़बड़ गा चतुरी। बात सबो के मानै चुपकन, काम करय बपुरी।। नाप तौल मा अव्वल ह...
सबले ज्यादा पढ़े गिस
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स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद) स्कूल पढ़े बर जाहूँ मोला, पकड़ा दे तँय बस्ता। कहिथे नोनी हर बाबू ला, बता स्कूल के रस्ता।। ...
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बाल कविता रिमझिम बरसे पानी हेम के चौपाई छंद रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी। चम-चम चमके बिजुरी रानी।। कड़-कड़ कड़के बादल भैया। नाचय मछर...
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गुड़िया रानी (चौपाई छंद) गुड़िया रानी बड़े सियानी। दूध-भात खा पीयय पानी।। सबके हावय लाड-दुलारी। सबले सुघ्घर राजकुमारी।। दौड़-दौड़ ...