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Showing posts from May, 2026

‎हेम के कुण्डलियाँ (सच)‎

सच बोली मा रूठथे, झूठन जग पतियाय। ‎पर हेमलाल सच कहे, चाहे जिवरा जाय।। ‎चाहे जिवरा जाय, साँच बोली सुखदाई। ‎झूठ लबारी तोर, कभू टीकय ना भाई।। ‎गुनके चुनके बोल, लगालव सच के चोली। ‎अपने स्वारथ छोड़, सदा सच बोलव बोली।। ‎- हेमलाल साहू गाँव- गिधवा, जिला बेमेतरा

‎*सीखव गिनती*‎

सीखव गिनती ‎ ‎आवव संगी सीखव गिनती। ‎मुनिया बबलू करथे बिनती।। ‎ ‎एक मया के ममता दाई। ‎दूध पान मा हवय भलाई।। ‎ ‎दू आँखी ले देखे मुनिया। ‎रंग बिरंगी हावय दुनिया।। ‎ ‎तीन रंग मा सजे तिरंगा। ‎देश प्रेम अउ हे मन चंगा।। ‎ ‎चार मास के बरसा पानी। ‎गाँव-गाँव मा करे किसानी।। ‎ ‎पाँच उंगरी एक हथेली। ‎मया-दया ला बाँट सहेली।। ‎ ‎छह ऋतु आवय बारी-बारी। ‎अपन रंग ले धरती सारी।। ‎ ‎सात सुरों मा गीत बनालव। ‎पेटी तबला संग बजालव।। ‎ ‎आठ पाँव के मकड़ी रानी, ‎जाल बुनय सारी जिनगानी।। ‎ ‎नौ दुवार के हावय काया। ‎बसथे उहाँ मोह अउ माया।। ‎ ‎दस उँगरी दू हाथ लगालव। ‎एक संग ले काम करालव।। ‎ ‎गिनती सीखव ज्ञान बढ़ावव। ‎पढ़-लिख के जिनगी चमकावव।। ‎ ‎-हेमलाल साहू ‎गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा ‎