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Showing posts from June, 2022

गुल्लू के गाँव (सरसी छंद)

गुल्लू के गाँव (सरसी छंद) कतका बढ़िया हवय शहर ले  गुल्लू के रे गाँव।। कच्चा-पक्का छाँही-खपरा, अलवा-जलवा ठाँव।। सुरुज देव के होत बिहनिया, जिहाँ परत हे पाँव। हरियर-हरियर डारा-पाना,  रुखराई के छाँव।। चिरई-चुरगुन घूमत हावय, डेना अपन पसार। अब्बड़ निक लागे सबला रे, तरिया नदिया पार।। जिहाँ किसानी मा जिनगानी, सुग्घर खेती खार। माहामाया दाई देवत, अन्न-धन्न भंडार।। छोटे-छोटे लगथे बढ़िया, जिहाँ हॉट बाजार। तौल मोल करके ले ले तँय, सब ला छाँट निमार।। दाई, काकी, दादी, बनही, सबके मया दुलार। बाबू, कका, बबा अउ भैया, हिम्मत देत अपार।। समरसता के दीया बारय, दूर करँय अँधियार भेद-भाव ला दूर भगावय, बाँधय सुमता पार।। सबले सुघ्गर हावय बेटा, गुल्लू के रे गाँव। कहिथे बाबू, बबलू रोशन, कतका मँय दुहराँव।। -हेमलाल साहू छंद साधक सत्र -१ ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा।

मोर ददा (बरवै छंद)

मोर ददा (बरवै छंद) बाल कविता मोर ददा हे सुग्घर, सबले पोठ। सुनले चिंकी बनही, मोरो गोठ।। अपन मानथौं जेला, जी भगवान। पूजा करँव नेक मँय, बन इंसान।। सच्चा हावय जेकर, मया दुलार। छाती जब्बर हिम्मत, हवे अपार।। डाँटय फटकारय अउ, देवय साथ। मोर सफलता मा हे, जेकर हाथ।। हम ला लेके जावय, पिकनिक टूर। छोड़ लड़ाई झगड़ा, रहिथे दूर।। घर के सबले बड़का, हवे सियान। खड़े हवय बइरी बर, सीना तान।। ददा मोर बर हावँय, विद्या ज्ञान। जेकर कारण मोरो, हे पहचान।। -हेमलाल साहू छंद साधक सत्र-१ ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

रक्तदान करलव (हेम के शंकर छंद)

रक्त करवल दान (हेम के शंकर छंद) बात बतावँत हावय चुन्नी, रक्त करलव दान। दूर भगालँव मन के डर ला, होय ना नुकसान।। तन-मन हा तोर स्वस्थ रइही, मोर कहना मान। दे दँव जी मरीज ला सुघ्गर, आप जीवनदान।। कैंसर जस कतको बीमारी, होय तन ले दूर। एक बार करके देखव जी, रक्तदान जरूर।। भाई-चारा सुम्मत बगरय, पूण्य हावय काज। सबला समझावँय चुन्नी हा, ठान लौ मन आज।। काम सबो के आवँन संगी, नेक बन इंसान। रक्त दान कर जग मा बढ़िया, काम करँव महान।। -हेमलाल साहू छंद साधक सत्र-1 ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा

*आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद)

*आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद) आजा-आजा बरखा रानी। इहाँ गिरादे झटकुन पानी।। सुरुज देव आगी फेंकत हे। हरर हरर सब ला सेंकत हे।। घाम जनावत हावय भारी। लू मा लगत हवय बीमारी।। तरिया, नदिया सबो अँटागे। कुँआ, बावली सबो सुखागे।। छोड़व बरखा आना-कानी। तरसत हावँय सबो परानी।। दिखही कब ये बदरी कारी। आही कब तोर इहाँ बारी।। आजा कँसके मार झकोरा। हावँय सब ला तोर अगोरा।। -हेमलाल साहू छन्द साधक, सत्र -1 ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

*परसा पेड़ (बरवै छंद)*

*परसा पेड़ (बरवै छंद)* हावय बड़ उपयोगी, परसा पेड़। पाबे खेत खार के, सुघ्घर मेड़।। आथे डारा पाना, जड़ फर काम। रोग भगाये तन ले, दै आराम।। सबो जीव के बनथे, सुघ्घर ठाँव। बचा घाम ले सब ला, देवय छाँव।। बड़का बड़का लावँय, पाना टोर। तुनथें पतरी दोना, कड़गी जोर।। फर टोर कमाले तँय, पैसा चार। औषधि कारण बीकै, ये बाजार।। रुख के जर ले निकलै, कुंवर बाख। बड़ गुणकारी हावय, एखर लाख।। -हेमलाल साहू ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

*पेड़ बचाबो ( चौपाई छंद)*

*पेड़ बचाबो ( चौपाई छंद)* ध्यान लगा के सुनले पिंकी। सुघ्घर बात कहत हे चिंकी।। मिलके आगू हाथ बढाबो। दुन्नो बहनी पेड़ बचाबो।। गाँव शहर ला हमन जगाबो। घर घर हरियारी ला लाबो।। निरमल पुरवइया बगराबो। मिलके सुघ्घर पेड़ लगाबो।। -हेमलाल साहू छंद साधक सत्र-१ ग्राम गिधवा,जिला बेमेतरा

हमर देश (चौपाई छंद)

हमर देश (चौपाई छंद) देश हमर हे सबले प्यारा। दया मया अउ भाई चारा।। हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई। आपस मा हम भाई-भाई।। जात-पात के करव विदाई। आपस मा झन होय लड़ाई।। सम-रसता के पाठ पढ़ावव। सुमता के रद्दा ल बनावव।। -हेमलाल साहू छंद साधक, सत्र-१ ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

जूनी मेला (हेम के चौपाई छंद)

मेला (हेम के चौपाई छंद) गाँव तीर मा जूनी मेला। हवय भराये रेलम पेला।। सब्बो डहर लगे हे ठेला।  बेचत अंगूर सेब केला।। बाबू कहिथे सोना-मोना।  हाथ पकड़ ले नइहे खोना। हावय भारी भीड़ भड़क्का। खावै सब्बो धक्कम धक्का। अल्ली ले नरियल के भेला। देख चढ़ावँय सुमर भगेला।। देखत मोना खई खजेना। बाबू ला बोलत कुछु लेना।। रंग बिरंगी अउ चितरंगी। फुग्गा लेवय सब्बो संगी। झूले खूब ढेलवा सोना। खेलवना ले मंगन मोना।। -हेमलाल साहू छंद साधक, सत्र-१ ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा

*बात-बात ले सीख* (हेम के जयकारी छंद)

*बात-बात ले सीख* (हेम के जयकारी छंद) ले लौ बात-बात ले सीख। कोनो ला बोलव झन खीख।। देश प्रेम के गाँवव गीत। सब ला राख बना के मीत।। दया -मया के नाता जोड़। सदा लड़ाई झगड़ा छोड़।। सुम्मत के मिल बाँधव पार। सम-रसता के बगरय नार।। बाँटव अपन ज्ञान ला जोर। जग मा लावँव नवा अँजोर। धरले मन साहस अउ धीर। सूरज बन अँधियारी चीर।। -हेमलाल साहू छन्द साधक, सत्र -1 ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा  

खेलव संगी (चौपाई छंद)

खेलव संगी (चौपाई छंद) खेलय संगी बाँटी भौरा। राउत पारा, दाऊ चौरा।। बगड़ू, बल्ला, दल्लू-बल्लू। आय संग मा बंटी, लल्लू।। खोखो खेल कबड्डी फुगड़ी। सोना-मोना बन के जुगड़ी।। रेस टीप खेलय पचरंगा। दाम देत ले रोवय गंगा।। घांदी मुंदी गिल्ली डण्डा। नवा-नवा खेले के फंडा।। खेल-खेल मा होथे योगा। तन मन होवै पोठ निरोगा।। -हेमलाल साहू छन्द साधक, सत्र -1 ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा  

आवाज (चौपाई छंद)

आवाज (चौपाई छंद) झर-झर, झर-झर बहिथे झरना। खन-खन खनके चूड़ी कँगना।। सरर-सरर चलथे पुरवइया। अम्मा-अम्मा बोलय गइया।। मैं-मैं करथे छेरी पठरू। बाजे डम-डम शिव के डमरू।। फड़-फड़ फड़थे कागज पुड़िया। हाँस-हाँस के खेलय गुड़िया।। मोटर के हारन पौं-पौं हे। आवाज कुकर के भौं-भौं हे।। म्याऊ-म्याऊ बोलय बिलई। चूँ-चूँ  करके चहकय चिरई।। -हेमलाल साहू छंद साधक, सत्र-१ ग्राम गिधवा, जिला बेमेतरा

जुगनू राजा (हेम के चौपाई छंद)

 गुड़िया रानी (चौपाई छंद) गुड़िया रानी बड़े सियानी। दूध भात खा पीयय पानी।। सबके हावय लाड दुलारी। सबले सुघ्घर राजकुमारी।। दौड़-दौड़ के खेलय रानी। करथे फेर अपन मनमानी।। थप-थप पीटय सुघ्गर थपड़ी। डफ डफ धरै बजावय दफड़ी।। छम-छम सुग्घर पायल बाजय। ढम्मक ढम्मक गुड़िया नाचय।। ला-ला ला-ला कहिके गावय। अम्मा अम्मा कहि चिल्लावय।। -हेमलाल साहू  छंद साधक, सत्र -1 ग्राम - गिधवा, जिला बेमेतरा

मीठा केला (हेम के चौपाई छंद)

मीठा केला (हेम के चौपाई छंद) पक्का पक्का मीठा केला। लावय झगरू भर भर ठेला।। गाँव-गाँव बेचे बर जावय। केला ले केला चिल्लावय।। सुनके चिंकी दौड़य सरपट। केला लेये बर ओ झटपट।। केला देखत मन ललचावय। ला ला ला ला गीत सुनावय।। माँगय केला चिंकी झप-झप। खाये ओला छिल के गप-गप।। -हेमलाल साहू छंद साधक, सत्र-१ ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा