सच बोली मा रूठथे, झूठन जग पतियाय।
पर हेमलाल सच कहे, चाहे जिवरा जाय।।
चाहे जिवरा जाय, साँच बोली सुखदाई।
झूठ लबारी तोर, कभू टीकय ना भाई।।
गुनके चुनके बोल, लगालव सच के चोली।
अपने स्वारथ छोड़, सदा सच बोलव बोली।।
- हेमलाल साहू
विष्णु पद छंद नोनी बाल कविता हमरो घर के नोनी हावय, अड़बड़ गा चतुरी। बात सबो के मानै चुपकन, काम करय बपुरी।। नाप तौल मा अव्वल ह...
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