सच बोली मा रूठथे, झूठन जग पतियाय।
पर हेमलाल सच कहे, चाहे जिवरा जाय।।
चाहे जिवरा जाय, साँच बोली सुखदाई।
झूठ लबारी तोर, कभू टीकय ना भाई।।
गुनके चुनके बोल, लगालव सच के चोली।
अपने स्वारथ छोड़, सदा सच बोलव बोली।।
- हेमलाल साहू
🐸 मेचका (बाल कविता) टप-टप बरसे सुग्घर पानी, नान्हे मन ला भावय। गात मया के गीत मेचका, टर्र-टर्र ले टर्रावय।। उत्ताधुर्रा जीभ लमावय...
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