Sunday, 31 May 2026

‎हेम के कुण्डलियाँ (सच)‎

सच बोली मा रूठथे, झूठन जग पतियाय।

‎पर हेमलाल सच कहे, चाहे जिवरा जाय।।

‎चाहे जिवरा जाय, साँच बोली सुखदाई।

‎झूठ लबारी तोर, कभू टीकय ना भाई।।

‎गुनके चुनके बोल, लगालव सच के चोली।

‎अपने स्वारथ छोड़, सदा सच बोलव बोली।।

‎- हेमलाल साहू

गाँव- गिधवा, जिला बेमेतरा


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