स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद) स्कूल पढ़े बर जाहूँ मोला, पकड़ा दे तँय बस्ता। कहिथे नोनी हर बाबू ला, बता स्कूल के रस्ता।। भर्ती मोला आज करा दे, स्कूल रोज मँय जाहूँ। सुनले विनती मोरो बाबू, सुघ्घर विद्या पाहूँ।। पढ़ई-लिखई मा जोर लगा, हरदम अव्वल रइहूँ।। खेल-कूद ले मन रख चंगा, सबले आगू बढ़हूँ।। पट्टी मा खड़िया ले खींचवँ, चंदा सूरज तारा। पोथी मा मोर मुकुट बना के, रंग-रंग के धारा।। आखर आखर गुन-गुन के मँय, पन्ना-पन्ना लिखहूँ। विद्या के जोत जगा मन मा, जिनगी ला मँय गढ़हूँ।। खुरमी चीला बरा ठेठरी, मुर्रा ले के जाहूँ। खाना छुट्टी बेर बाँट के, संगी साथी सँग खाहूँ।। अपन स्कूल मा होशियार बन, जग मा नाम कमाहूँ। मास्टर जी कस ज्ञान सीख के, सबला रोज पढ़ाहूँ।। पढ़ई लिखई भविष्य कुंजी। हमर ज्ञान जिनगी के पूँजी।। रचनाकार- हेमलाल साहू गाँव -गिधवा, जिला बेमेतरा
हेम के छत्तीसगढ़ी बाल कविता
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