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‎*सीखव गिनती*‎

सीखव गिनती

‎आवव संगी सीखव गिनती।

‎मुनिया बबलू करथे बिनती।।

‎एक मया के ममता दाई।

‎दूध पान मा हवय भलाई।।

‎दू आँखी ले देखे मुनिया।

‎रंग बिरंगी हावय दुनिया।।

‎तीन रंग मा सजे तिरंगा।

‎देश प्रेम अउ हे मन चंगा।।

‎चार मास के बरसा पानी।

‎गाँव-गाँव मा करे किसानी।।

‎पाँच उंगरी एक हथेली।

‎मया-दया ला बाँट सहेली।।

‎छह ऋतु आवय बारी-बारी।

‎अपन रंग ले धरती सारी।।

‎सात सुरों मा गीत बनालव।

‎पेटी तबला संग बजालव।।

‎आठ पाँव के मकड़ी रानी,

‎जाल बुनय सारी जिनगानी।।

‎नौ दुवार के हावय काया।

‎बसथे उहाँ मोह अउ माया।।

‎दस उँगरी दू हाथ लगालव।

‎एक संग ले काम करालव।।

‎गिनती सीखव ज्ञान बढ़ावव।

‎पढ़-लिख के जिनगी चमकावव।।

‎-हेमलाल साहू

‎गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा

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स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद)

‎स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद) ‎ ‎स्कूल पढ़े बर जाहूँ मोला, ‎पकड़ा दे तँय बस्ता। ‎कहिथे नोनी हर बाबू ला, ‎बता स्कूल के रस्ता।। ‎ ‎भर्ती मोला आज करा दे, ‎स्कूल रोज मँय जाहूँ। ‎सुनले विनती मोरो बाबू, ‎सुघ्घर विद्या पाहूँ।। ‎ ‎पढ़ई-लिखई मा जोर लगा, ‎हरदम अव्वल रइहूँ।। ‎खेल-कूद ले मन रख चंगा, ‎सबले आगू बढ़हूँ।। ‎ ‎पट्टी मा खड़िया ले खींचवँ,  ‎चंदा सूरज तारा।   ‎पोथी मा मोर मुकुट बना के,  ‎रंग-रंग के धारा।। ‎ ‎आखर आखर गुन-गुन के मँय,   ‎पन्ना-पन्ना लिखहूँ।   ‎विद्या के जोत जगा मन मा, ‎जिनगी ला मँय गढ़हूँ।। ‎ ‎खुरमी चीला बरा ठेठरी,  ‎मुर्रा ले के जाहूँ। ‎खाना छुट्टी बेर बाँट के, ‎संगी साथी सँग खाहूँ।। ‎ ‎अपन स्कूल मा होशियार बन, ‎जग मा नाम कमाहूँ। ‎मास्टर जी कस ज्ञान सीख के, ‎सबला रोज पढ़ाहूँ।। ‎ ‎पढ़ई लिखई भविष्य कुंजी। ‎हमर ज्ञान जिनगी के पूँजी।। ‎ ‎रचनाकार- हेमलाल साहू ‎गाँव -गिधवा, जिला बेमेतरा  ‎

रिमझिम बरसे पानी

रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी। चम-चम चमके बजली रानी।। कड़-कड़ कड़के बादल भैया। नाचय मछरी ता-ता थैया।। छाय घटा हे काली-काली। भरही नदिया नरवा नाली।। होके मगन मयूरी नाचय। खुश होके प्रानी मन हाँसय।। टर्र-टर्र मेढ़क नरियावय। पानी ला ओ पास बलावय।। खेलत हावय घोंघी घांदी। झुमके करते स्वागत कांदी।। छाही जग मा अब हरियाली। देख केकड़ा पीटत ताली।। -हेमलाल साहू ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा

गुड़िया रानी (चौपाई छंद)

   गुड़िया रानी (चौपाई छंद) गुड़िया रानी बड़े सियानी। दूध भात खा पीयय पानी।। सबके हावय लाड दुलारी। सबले सुघ्घर राजकुमारी।। दौड़-दौड़ के खेलय रानी। करथे फेर अपन मनमानी।। थप-थप पीटय सुघ्गर थपड़ी। डफ डफ धरै बजावय दफड़ी।। छम-छम सुग्घर पायल बाजय। ढम्मक ढम्मक गुड़िया नाचय।। ला-ला ला-ला कहिके गावय। अम्मा अम्मा कहि चिल्लावय।। -हेमलाल साहू  छंद साधक, सत्र -1 ग्राम - गिधवा, जिला बेमेतरा