Wednesday, 27 May 2026

‎*सीखव गिनती*‎

सीखव गिनती

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‎आवव संगी सीखव गिनती।

‎मुनिया बबलू करथे बिनती।।

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‎एक मया के ममता दाई।

‎दूध पान मा हवय भलाई।।

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‎दू आँखी ले देखे मुनिया।

‎रंग बिरंगी हावय दुनिया।।

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‎तीन रंग मा सजे तिरंगा।

‎देश प्रेम अउ हे मन चंगा।।

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‎चार मास के बरसा पानी।

‎गाँव-गाँव मा करे किसानी।।

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‎पाँच उंगरी एक हथेली।

‎मया-दया ला बाँट सहेली।।

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‎छह ऋतु आवय बारी-बारी।

‎अपन रंग ले धरती सारी।।

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‎सात सुरों मा गीत बनालव।

‎पेटी तबला संग बजालव।।

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‎आठ पाँव के मकड़ी रानी,

‎जाल बुनय सारी जिनगानी।।

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‎नौ दुवार के हावय काया।

‎बसथे उहाँ मोह अउ माया।।

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‎दस उँगरी दू हाथ लगालव।

‎एक संग ले काम करालव।।

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‎गिनती सीखव ज्ञान बढ़ावव।

‎पढ़-लिख के जिनगी चमकावव।।

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‎-हेमलाल साहू

‎गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा

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