हेम के दोहे (बाल जनऊला-1)
नाच नचावय अंगरी, बड़का हवय सुजान।
दुनिया भर के गोठ ला, पहुँचाय तोर कान।।
संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस।
हाथ लगा आवय नहीं, अंधियार मा नास।।
बिन संगी आधार ना, जोड़ी बिन बेकार।
पहरा देवय बैठ के, असली पहरेदार।।
सूंघ-सूंघ पहिचान ले, पावय लाड दुलार।
चोर उचक्का देख के, ओला करय फरार।।
एक गोल डिबिया धरय, बारहठन के अंग।
तीन सिपाही सँग चले, समय बतावय रंग।।
पन्ना अपन समेट के, भर रखथे भंडार।
मोती दाना खोज के, मन के दीया बार।।
अपन पसीना सींचथे, उठथे होत बिहान।
लावय हरियर सोनहा, कोन हरे पहिचान।।
हरियर थाली ले भरे, पहिरय बाली सोन।
चार मुड़ा ले डाड़ हे, बता सखी ये कोन।।
एक जगे दूजा सुते, अपन चढ़ावय रंग।
जिनगी के गाड़ी चले, रहय कभू ना संग।।
नान्हे दाना पेट मा, धर रखथे जग छाँव।
बड़का हो फल-फूल दे, बूझव संगी नाँव।।
उत्तर:-1. मोबाइल, 2. छइहाँ (परछाई), 3. तारा-कूची (ताला-चाबी), 4. कुकुर (कुत्ता), 5. घड़ी, 6. पोथी (किताब), 7. किसान, 8. खेती-खार (खेत-खलिहान), 9. दिन-रात, 10. बीजा (बीज)
रचनाकार - हेमलाल साहू
चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा
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