Saturday, 20 June 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला-1)

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला-1)
‎नाच नचावय अंगरी, बड़का हवय सुजान।
‎दुनिया भर के गोठ ला, पहुँचाय तोर कान।।
‎संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस।
‎हाथ लगा आवय नहीं, अंधियार मा नास।।
‎बिन संगी आधार ना, जोड़ी बिन बेकार।
‎पहरा देवय बैठ के, असली पहरेदार।।
‎सूंघ-सूंघ पहिचान ले, पावय लाड दुलार।
‎चोर उचक्का देख के, ओला करय फरार।।
‎एक गोल डिबिया धरय, बारहठन के अंग।
‎तीन सिपाही सँग चले, समय बतावय रंग।।
‎पन्ना अपन समेट के, भर रखथे भंडार।
‎मोती दाना खोज के, मन के दीया बार।।
‎अपन पसीना सींचथे, उठथे होत बिहान।
‎लावय हरियर सोनहा, कोन हरे पहिचान।।
‎हरियर थाली ले भरे, पहिरय बाली सोन।
‎चार मुड़ा ले डाड़ हे, बता सखी ये कोन।।
‎एक जगे दूजा सुते, अपन चढ़ावय रंग।
‎जिनगी के गाड़ी चले, रहय कभू ना संग।।
‎नान्हे दाना पेट मा, धर रखथे जग छाँव।
‎बड़का हो फल-फूल दे, बूझव संगी नाँव।।
‎उत्तर:-1. मोबाइल, 2. छइहाँ (परछाई), 3. तारा-कूची (ताला-चाबी), 4. कुकुर (कुत्ता), 5. घड़ी, 6. पोथी (किताब), 7. किसान, 8. खेती-खार (खेत-खलिहान), 9. दिन-रात, 10. बीजा (बीज)
‎रचनाकार - हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 

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