पहली रहिस साइकिल, घर के शान।
रहय अपन घर के ओ, बन पहिचान।।
दीदी नोनी बाबू, सबो सियान।
दाई बबा चलावय, सबो जवान।।
कम खर्चा पानी मा, चलय गुजार।।
दौड़य गली खोर अउ, सब संसार।।
ट्रिन ट्रिन बजाय घंटी, देय धियान।
लान साइकिल लेवय, काम किसान।।
पगडंडी मा भागय, बड़ रफ्तार।
गाँव शहर ला घूमे, पैडिल मार।।
एक एक पैडिल के, खूब धमाल।
तोर बना सेहत ला, करय कमाल।।
डीजल तेल के नहीं, बनय गुलाम।
मिहनत बदला सेहत, मिलय इनाम।।
बिना प्रदूषण दौड़ा, इहि जग सार।
चला साइकिल करलव, मया दुलार।।
रचनाकार - हेमलाल साहू
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