Friday, 5 June 2026

साइकिल

पहली रहिस साइकिल, घर के शान।

‎रहय अपन घर के ओ, बन पहिचान।।


‎दीदी नोनी बाबू, सबो सियान।

‎दाई बबा चलावय, सबो जवान।।


‎कम खर्चा पानी मा, चलय गुजार।।

‎दौड़य गली खोर अउ, सब संसार।।


‎ट्रिन ट्रिन बजाय घंटी, देय धियान।

‎लान साइकिल लेवय, काम किसान।।


‎पगडंडी मा भागय, बड़ रफ्तार।

‎गाँव शहर ला घूमे, पैडिल मार।।


‎एक एक पैडिल के, खूब धमाल।

‎तोर बना सेहत ला, करय कमाल।।


‎डीजल तेल के नहीं, बनय गुलाम।

‎मिहनत बदला सेहत, मिलय इनाम।।


‎बिना प्रदूषण दौड़ा, इहि जग सार।

‎चला साइकिल करलव, मया दुलार।।


‎रचनाकार - हेमलाल साहू

‎गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा



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