Wednesday, 17 June 2026

‎खेलँय संगी (चौपाई छंद)‎

‎खेलँय संगी (चौपाई छंद)
‎
‎खेलँय संगी बाँटी भौरा।
‎राउत पारा, दाऊ चौरा।।
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‎गोल गोल ले भौरा नाँचय।
‎देख देख के लइका हाँसय।।
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‎बगड़ू बल्ला खिंचे रस्सी।
‎कोन जीतथे रस्सा कस्सी।।
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‎देखय गंगा बंटी बल्लू।
‎बैठे तीर मा कुकुर कल्लू।।
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‎घाम चढ़े ले खेलँय फुगड़ी।
‎लइका सकलाइन बन जुगड़ी।।
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‎खेल कबड्डी पीटय ताली।
‎दाँव परे ले चिन्हा लाली।।
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‎संझा बेरा चोर-सिपाही।  
‎लुका-छुपी मा माजा आही।।
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‎खेल लंगड़ी अंधा कानी।
‎गाँव गली के खेल निशानी।।
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‎रेस टीप खेलँय पचरंगा।
‎ठप्पा बजा भाग ले गंगा।।
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‎घांदी मूंदी खेल सहेली।
‎खेल खेल मा पूछ पहेली।।
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‎खेलँय कोलाल धरे डंडा।
‎नवा-नवा खेले के फंडा।।
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‎खोखो खेलँय मन भर भागँय।
‎बइठे खड़े दाँव ला पालँय।। 
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‎डंडा मारय उड़थे गिल्ली । 
‎जइसे जाये जहाज दिल्ली।।
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‎सगली भदली खेल सजावँय।
‎पुतरी-पुतरा बिहा रचावँय।।
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‎मोबाइल के छोड़ खुमारी।
‎खेल बने असल संगवारी।।
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‎खेल खेल मा होवय योगा।
‎तन मन होवै पोठ निरोगा।।
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‎रचनाकार-हेमलाल साहू
‎गाँव - गिधवा, जिला -बेमेतरा 
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