Saturday, 20 June 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)
‎रतिहा आवय काम मा, बटन मसक दे थोर।
‎रहिथे चुप अरझे परे, लावय बड़ अंजोर।।
‎नान-नान धर दाँत मा, सुलझा देवय केस।
‎उलझन ला दुरिहा भगा, बूझव येकर भेस।।
‎करिया काया ला धरे, पहिरे उप्पर कोट।
‎उज्जर पन्ना ला भरे, होवत जावय छोट।।
‎मुड़ मा नाचे पाँव बिन, तन के तानय तार।
‎बरखा चाहे घाम हो, बन जावय रखवार।।
‎झूठ कपट रखथे कहाँ, सच के देथे साथ।
‎जइसे ला तइसे दिखा, धरय जेन हा हाथ।।
‎नान नान कड़गी जुरे, जेकर पाँव हजार।
‎कचरा दुश्मन तोर ये, खेदय घर के पार।।
‎दून्नो संगी एक हो, जावय खेती खार।
‎काँटा खूँटी ले बचा, सेवा देय अपार।।
‎पोथी कापी ला भरे, अपन पेट भंडार।
‎नोनी बाबू संग चल, बनके पक्का यार।।
‎दूठन चक्का ले चले, कसरत के ये खेल।
‎पैसा हर बांचय घलो, अपन पाँव ले पेल।।
‎नइहे मुँह ता बोलथे, निकले तोर पुकार।
‎टन-टन करके सोर दे, हो जावय तैयार।।
‎उत्तर : १. बल्ब (बिजली बत्ती) 💡 | २. कंघी 🪮 | ३. पेंसिल ✏️ | ४. छाता ☂️ | ५. आईना (दर्पण) 🪞 | ६. झाड़ू 🧹 | ७. पनही-चप्पल 🩴 | ८. बस्ता 🎒 | ९. साइकिल 🚲 | १०. घंटी 🔔
‎रचनाकार - हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 

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