हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)
रतिहा आवय काम मा, बटन मसक दे थोर।
रहिथे चुप अरझे परे, लावय बड़ अंजोर।।
नान-नान धर दाँत मा, सुलझा देवय केस।
उलझन ला दुरिहा भगा, बूझव येकर भेस।।
करिया काया ला धरे, पहिरे उप्पर कोट।
उज्जर पन्ना ला भरे, होवत जावय छोट।।
मुड़ मा नाचे पाँव बिन, तन के तानय तार।
बरखा चाहे घाम हो, बन जावय रखवार।।
झूठ कपट रखथे कहाँ, सच के देथे साथ।
जइसे ला तइसे दिखा, धरय जेन हा हाथ।।
नान नान कड़गी जुरे, जेकर पाँव हजार।
कचरा दुश्मन तोर ये, खेदय घर के पार।।
दून्नो संगी एक हो, जावय खेती खार।
काँटा खूँटी ले बचा, सेवा देय अपार।।
पोथी कापी ला भरे, अपन पेट भंडार।
नोनी बाबू संग चल, बनके पक्का यार।।
दूठन चक्का ले चले, कसरत के ये खेल।
पैसा हर बांचय घलो, अपन पाँव ले पेल।।
नइहे मुँह ता बोलथे, निकले तोर पुकार।
टन-टन करके सोर दे, हो जावय तैयार।।
उत्तर : १. बल्ब (बिजली बत्ती) 💡 | २. कंघी 🪮 | ३. पेंसिल ✏️ | ४. छाता ☂️ | ५. आईना (दर्पण) 🪞 | ६. झाड़ू 🧹 | ७. पनही-चप्पल 🩴 | ८. बस्ता 🎒 | ९. साइकिल 🚲 | १०. घंटी 🔔
रचनाकार - हेमलाल साहू
चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा
No comments:
Post a Comment