Saturday, 12 September 2026

‎🐸 मेचका (बाल कविता)‎

‎🐸 मेचका (बाल कविता)
‎
‎टप-टप बरसे सुग्घर पानी,
‎नान्हे मन ला भावय।
‎गात मया के गीत मेचका,
‎टर्र-टर्र ले टर्रावय।।
‎
‎उत्ताधुर्रा जीभ लमावय,
‎फट ले कीरा खावय।
‎हरियर पाना ऊपर बइठे,
‎पानी मा इतरावय।।
‎
‎चुभुक-चुभुक पानी नापय,
‎तिर मा बिला बनावय।
‎सुग्घर बरखा झड़ी देख के,
नाचत-गावत जावय।।।
‎
‎हरियर पाना नाव बनाके,
‎रोज किंजरय तरिया।
‎साँप देख के कूदत-फाँदत,
‎भागय ओहर परिया।।
‎
‎नान्हे लइका देखत रहिथे,
‎कहाँ मेचका जाथे।
‎टर्र-टर्र के बोली सुनके,
‎जम्मो झन मुसकाथे।।
‎
‎रचनाकार - हेमलाल साहू, गिधवा (बेमेतरा)
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Friday, 11 September 2026

‎🐒 बेंदरा (बाल कविता)‎

‎🐒 बेंदरा (बाल कविता)
‎
‎लकर-धकर ले कूद बेंदरा, 
‎डार-डार चढ़ जाथे।
‎टोर-टोर आमा अउ केरा,
‎झप-झप सबला खाथे।।
‎
‎पान ले बना टोपी पहिरे,
‎घूम-घूम इतराथे।
‎कुकुर के पूँछ पकड़ के फेर,
‎खूब ओला चिढ़ाथे।।
‎
‎लइका मन के मुँह के लड्डू,
‎झपट के भाग जाथे।
‎उप्पर चढ़के मुँह बिचकाके,
‎दाँत ला खीसियाथे।।
‎
‎ठुमक-ठुमक के नाचत जाथे,
‎पूँछी गोल घुमाथे।
‎नान्हे लइका देख-देख के,
‎धरती मा लोटाथे।।
‎
‎रचनाकार - हेमलाल साहू, गिधवा (बेमेतरा)

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‎नान्हे हाथ (बाल कविता)

‎नान्हे हाथ (बाल कविता)
‎
‎नान्हे-नान्हे हाथ हमर हे,
‎बड़का करय कमाल।
‎आव, हाथ ले हाथ मिलाबो,
‎गाँव होय खुशहाल।।
‎
‎रुख-राई ला हाथ ले रोपबो,
‎देबो पानी रोज।
‎हरियाली ला देख-देख के,
‎खाबो फर के भोज।।
‎
‎कचरा ला हाथ ले बीनबो,
‎राखबो साफ-सफई।
‎अँगना-गली सबो चमकाबो,
‎सबके होही भलई।।
‎
‎पढ़-लिख के आगू बढ़बो,
‎रखबो नीक बिचार।
‎मया-दया के नाता रखबो,
‎लाबो नव उजियार।।
‎
‎रचनाकार— हेमलाल साहू
‎गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा
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‎🐸 मेचका (बाल कविता)‎

‎🐸 मेचका (बाल कविता) ‎ ‎टप-टप बरसे सुग्घर पानी, ‎नान्हे मन ला भावय। ‎गात मया के गीत मेचका, ‎टर्र-टर्र ले टर्रावय।। ‎ ‎उत्ताधुर्रा जीभ लमावय...

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