नान्हे-नान्हे हाथ हमर हे,
बड़का करय कमाल।
आव, हाथ ले हाथ मिलाबो,
गाँव होय खुशहाल।।
रुख-राई ला हाथ ले रोपबो,
देबो पानी रोज।
हरियाली ला देख-देख के,
खाबो फर के भोज।।
कचरा ला हाथ ले बीनबो,
राखबो साफ-सफई।
अँगना-गली सबो चमकाबो,
सबके होही भलई।।
पढ़-लिख के आगू बढ़बो,
रखबो नीक बिचार।
मया-दया के नाता रखबो,
लाबो नव उजियार।।
रचनाकार— हेमलाल साहू
गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा
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