लकर-धकर ले कूद बेंदरा,
डार-डार चढ़ जाथे।
टोर-टोर आमा अउ केरा,
झप-झप सबला खाथे।।
पान ले बना टोपी पहिरे,
घूम-घूम इतराथे।
कुकुर के पूँछ पकड़ के फेर,
खूब ओला चिढ़ाथे।।
लइका मन के मुँह के लड्डू,
झपट के भाग जाथे।
उप्पर चढ़के मुँह बिचकाके,
दाँत ला खीसियाथे।।
ठुमक-ठुमक के नाचत जाथे,
पूँछी गोल घुमाथे।
नान्हे लइका देख-देख के,
धरती मा लोटाथे।।
रचनाकार - हेमलाल साहू, गिधवा (बेमेतरा)
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