गरमी मा आथे आमा हर।
जाबो घूमे ला मामा घर।।
कहिथे गरिमा, सुन गा कक्का।
टोर लानबो आमा पक्का।।
बड़का बाग हवय आमा के।
सुघ्घर हावय घर मामा के।।
लटलट ले फरथे आमा फर।
रुख के पाना हरियर-हरियर।।
पिंयर-पिंयर आमा दिखथे।
हाट-बाट मा अब्बड़ बिकथे।।
आमा देखत मुँह मा पानी।
काँट-काँट के खाबो चानी।।
आमा फर के आये राजा।
खाबो खट्टा-मीठा ताजा।।
कहिथे गरिमा, सुन गा कक्का।
मोला देवव आमा पक्का।।
रुख मा चढ़गे झट कक्का हर।
टोर गिरावय ओ पक्का फर।।
झट-झट बिनके धर आमा फर।
कच्चा-पक्का मा झोला भर।।
हाँसत-गावत घर ला आइन।
आमा खाके सब मुस्काइन।।
रचनाकार -हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला- बेमेतरा