Sunday, 2 August 2026

आइस मौसम जाड़ा*

‎*आइस मौसम जाड़ा*
‎सुघ्घर आइस मौसम जाड़ा।
‎चारो डहर ओस के माड़ा।।
‎भोर बिहनिया मोती चमकत।
‎सुरुज देव निकरे ता दमकत।।
‎फुलवा जाड़ा मा मुस्कावत।
‎रंग-बिरंगा सब ला भावत।।
‎चिरई-चिरगुन बइठे ठुठरत।
‎सबो जीव जाड़ा मा कुड़कत।।
‎हाथ गोड़ हर काँपत कसके।
‎दाँत किटकिटावत हे जमके।।
‎सुरुज देव गरमी बगरावत।
‎देखत-देखत जाड़ा भागत।।
‎सुन ले बहनी, सुन ले बेटी।
‎जाड़ कपावत खोलव पेटी।।
‎कथरी, चद्दर, शाल, रजाई।
‎स्वेटर, टोपी, ओढ़व भाई।।
‎तापव भूर्री ला मन भर ले।
‎जाड़ा भगाव सब्बो तन ले।।
‎रचनाकार -हेमलाल साहू 
‎गाँव - गिधवा, जिला- बेमेतरा

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