मया के डोर
बाल कविता
अपन देस बर जीबो-मरबो, रखबो ओकर मान।
बापू के सत रद्दा चलके, गढ़व नवा पहिचान।।
गौतम ले दया-मया सीखव, पावव सच्चा ज्ञान।
आजाद-भगत जइसन बनके, बनव देस के शान।।
मिलके समरसता बगराबो, जुड़य मया के डोर।
मया-दया ला बाटव सुघ्घर, देस के सबो ओर।।
हरियर लुगरा ला पहिराबो, हँसही धरती मोर।
जंगल-झाड़ी सब मुसकाही, फुलही अँचरा कोर।।
सबो डहर खुशहाली रइही, चिरई मन के सोर।
गाँव गाँव ला सरग बनाबो, लाबो नवा अँजोर।।
रचनाकार : हेमलाल साहू
गाँव : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
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