Saturday, 1 August 2026

‎हेम के सरसी छंद *मया के डोर*

‎हेम के सरसी छंद
‎
‎मया के डोर
‎
‎बाल कविता
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‎नान्हे-नान्हे लइका हावन, बनबो पहरेदार।
‎बापू के रद्दा मा चलबो, लाबो नव उजियार।।
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‎गौतम बुद्ध ले दया सीखव, पावव सत्य गियान।
‎भगत सिंह जस बनके संगी, रखबो भारत मान।।
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‎मिलके समरसता बगराबो, जोड़ मया के डोर।
‎मया-दया ला हमन बाँटबो, देस के सबो छोर।।
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‎हरियर लुगरा ला पहिराबो, हँसही धरती मोर।
‎जंगल-झाड़ी मन मुसकाही, फुलही जम्मो ओर।।
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‎सबो डहर खुशहाली रइही, चिरई मन के सोर।
‎गाँव-गाँव ला सरग बनाबो, बगराबो अंजोर।।
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‎रचनाकार : हेमलाल साहू
‎गाँव : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
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