Monday, 3 August 2026

‎गरमी मा आथे आमा चौपाई छंद

‎*गरमी मा आथे आमा* चौपाई
‎गरमी मा आथे आमा हर।
‎जाबो घूमे ला मामा घर।।
‎कहिथे गरिमा, सुन गा कक्का।
‎टोर लानबो आमा पक्का।।
‎बड़का बाग हवय आमा के।
‎सुघ्घर हावय घर मामा के।।
‎लटलट ले फरथे आमा फर।
‎रुख के पाना हरियर-हरियर।।
‎पिंयर-पिंयर आमा दिखथे।
‎हाट-बाट मा अब्बड़ बिकथे।।
‎आमा देखत मुँह मा पानी।
‎काँट-काँट के खाबो चानी।।
‎आमा फर के आये राजा।
‎खाबो खट्टा-मीठा ताजा।।
‎कहिथे गरिमा, सुन गा कक्का।
‎मोला देवव आमा पक्का।।
‎रुख मा चढ़गे झट कक्का हर।
‎टोर गिरावय ओ पक्का फर।।
‎झट-झट बिनके धर आमा फर।
‎कच्चा-पक्का मा झोला भर।।
‎हाँसत-गावत घर ला आइन।
‎आमा खाके सब मुस्काइन।।
‎रचनाकार -हेमलाल साहू 
‎गाँव - गिधवा, जिला- बेमेतरा

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