Sunday, 2 August 2026

‎हमला दवँ वरदान‎(हेम के सरसी छंद)‎

‎
‎बाल कविता
‎हमला दवँ वरदान
‎(हेम के सरसी छंद)
‎
‎नान्हे-नान्हे लइका हावँन,
‎हमला दवँ वरदान।
‎आसा लेके आये हावँन, 
‎सुनव मोर भगवान।।
‎
‎मन मा सुम्मत समरसता के, 
‎दीया ला दवँ बार।
‎मेटव मन के जमे मइल ला,
‎दूर करव अँधियार।।
‎
‎हमरो मन विश्वास जगाके,
‎हिम्मत भरव अपार।
‎मानवता रग-रग मा भर के,
‎एही दवँ उपकार।।
‎
‎होवय झन गलती हमरो ले,
‎मन के हावँन साफ।
‎नान्हे-नान्हे लइका हावँन,
‎गलती करहूँ माफ।।
‎
‎रचनाकार : हेमलाल साहू
‎ग्राम : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
‎

No comments:

Post a Comment

‎🐸 मेचका (बाल कविता)‎

‎🐸 मेचका (बाल कविता) ‎ ‎टप-टप बरसे सुग्घर पानी, ‎नान्हे मन ला भावय। ‎गात मया के गीत मेचका, ‎टर्र-टर्र ले टर्रावय।। ‎ ‎उत्ताधुर्रा जीभ लमावय...

सबले ज्यादा पढ़े गिस