बाल कविता
हमला दवँ वरदान
(हेम के सरसी छंद)
नान्हे-नान्हे लइका हावँन,
हमला दवँ वरदान।
आसा लेके आये हावँन,
सुनव मोर भगवान।।
मन मा सुम्मत समरसता के,
दीया ला दवँ बार।
मेटव मन के जमे मइल ला,
दूर करव अँधियार।।
हमरो मन विश्वास जगाके,
हिम्मत भरव अपार।
मानवता रग-रग मा भर के,
एही दवँ उपकार।।
होवय झन गलती हमरो ले,
मन के हावँन साफ।
नान्हे-नान्हे लइका हावँन,
गलती करहूँ माफ।।
रचनाकार : हेमलाल साहू
ग्राम : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
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