विष्णु पद छंद
नोनी
बाल कविता
हमरो घर के नोनी हावय,
अड़बड़ गा चतुरी।
बात सबो के मानै चुपकन,
काम करय बपुरी।।
नाप तौल मा अव्वल हावय,
करथे कम खरचा।
जाके दुकान हिसाब जोड़य,
लेवय बिल परचा।।
छान कुनकुना पानी पीयव,
नोनी रोज कहै।
खावव भाजी पाला संगी,
सदा निरोग रहैे।।
माँज धोके रखय नोनी हा,
घर के सब टठिया।
सुख्खा कचरा गिल्ला कचरा,
रखथे सब छटिया।।
गली-खोर ला साफ रखे ले,
रोग भगे दुरिया।
तेकर सेती लीपव-पोतव,
अँगना घर-कुरिया।।
पढ़ई लिखई नोनी करथे,
बिहना ले उठके।
करय रोज के योगासन ला,
मन चंगा करके।।
बात-बात ले सीखय नोनी,
छोट-बड़े सब ले।
गुरतुर बानी छत्तीसगढ़ी,
बोलय बड़ मन ले।।
कहिथे नोनी दाई भाखा,
बोलव मान बढ़ी।
पढ़ई-लिखई करलव भाषा,
ले छत्तीसगढ़ी।।
रचनाकार -हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा
No comments:
Post a Comment