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‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–6)‎

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–6)
‎सादा कपड़ा ओढ़ के, धरथे साधू भेस।
‎पानी भीतर झाँकके, झटले धर लीलेस।।
‎गलती ला गप्पल जथे, कबो नहीं चिचियाय।
‎कागज उप्पर फेर दे, सबो साफ हो जाय।।
‎घर के आगू ठाढ़ हे, चौड़ा सीना तान।
‎पहरा देवय रात दिन, का हे नाव सुजान।।
‎सोना जइसन रंग हे, किसान रखय समेट।
‎पूजा करय किसान मन, भरथे कोठी पेट।।
‎रतिहा परदा फार के, लावय नवा बिहान।
‎तोर बिना जग कुछु नहीं, बूझव नाव सियान।।
‎पानी पीके जीय थे, बिन पानी अइलाय।
‎पटकू ला ओढ़े हरा, अँगना भर मुस्काय।।
‎बड़े-बड़े ले मूछ हे, छोट जीव के काल।
‎दबके बइठे ताकथे, धीरज चतुरा चाल।।
‎करिया काया नानकुन, चोककु लम्बा दाँत।
‎कुतर-कुतर के धान खा, ची-ची करथे बात।।
‎लकड़ी रस्सी देह हे, एक चलय ना पाँव।
‎लेटत भर ले नींद दे, बूझव ओकर नाव।।
‎नइ उड़य ओ अगास मा, फेर पाँख हे चार।
‎फरफर-फरफर घूम के, देय पसीना मार।।
‎उत्तरमाला 
‎🐦 कोकड़ा (बगुला) | ✏️ मेटली (रबर) | 🚪 कपाट (दरवाजा) | 🌾 धान | ☀️ सूरज | 🌱 पौधा | 🐱 बिलई (बिल्ली) | 🐭 मुसवा (चूहा) | 🛏️ खटिया(खाट)| 🌬️ पंखा
‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा

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स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद)

‎स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद) ‎ ‎स्कूल पढ़े बर जाहूँ मोला, ‎पकड़ा दे तँय बस्ता। ‎कहिथे नोनी हर बाबू ला, ‎बता स्कूल के रस्ता।। ‎ ‎भर्ती मोला आज करा दे, ‎स्कूल रोज मँय जाहूँ। ‎सुनले विनती मोरो बाबू, ‎सुघ्घर विद्या पाहूँ।। ‎ ‎पढ़ई-लिखई मा जोर लगा, ‎हरदम अव्वल रइहूँ।। ‎खेल-कूद ले मन रख चंगा, ‎सबले आगू बढ़हूँ।। ‎ ‎पट्टी मा खड़िया ले खींचवँ,  ‎चंदा सूरज तारा।   ‎पोथी मा मोर मुकुट बना के,  ‎रंग-रंग के धारा।। ‎ ‎आखर आखर गुन-गुन के मँय,   ‎पन्ना-पन्ना लिखहूँ।   ‎विद्या के जोत जगा मन मा, ‎जिनगी ला मँय गढ़हूँ।। ‎ ‎खुरमी चीला बरा ठेठरी,  ‎मुर्रा ले के जाहूँ। ‎खाना छुट्टी बेर बाँट के, ‎संगी साथी सँग खाहूँ।। ‎ ‎अपन स्कूल मा होशियार बन, ‎जग मा नाम कमाहूँ। ‎मास्टर जी कस ज्ञान सीख के, ‎सबला रोज पढ़ाहूँ।। ‎ ‎पढ़ई लिखई भविष्य कुंजी। ‎हमर ज्ञान जिनगी के पूँजी।। ‎ ‎रचनाकार- हेमलाल साहू ‎गाँव -गिधवा, जिला बेमेतरा  ‎

रिमझिम बरसे पानी

रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी। चम-चम चमके बजली रानी।। कड़-कड़ कड़के बादल भैया। नाचय मछरी ता-ता थैया।। छाय घटा हे काली-काली। भरही नदिया नरवा नाली।। होके मगन मयूरी नाचय। खुश होके प्रानी मन हाँसय।। टर्र-टर्र मेढ़क नरियावय। पानी ला ओ पास बलावय।। खेलत हावय घोंघी घांदी। झुमके करते स्वागत कांदी।। छाही जग मा अब हरियाली। देख केकड़ा पीटत ताली।। -हेमलाल साहू ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा

गुड़िया रानी (चौपाई छंद)

   गुड़िया रानी (चौपाई छंद) गुड़िया रानी बड़े सियानी। दूध भात खा पीयय पानी।। सबके हावय लाड दुलारी। सबले सुघ्घर राजकुमारी।। दौड़-दौड़ के खेलय रानी। करथे फेर अपन मनमानी।। थप-थप पीटय सुघ्गर थपड़ी। डफ डफ धरै बजावय दफड़ी।। छम-छम सुग्घर पायल बाजय। ढम्मक ढम्मक गुड़िया नाचय।। ला-ला ला-ला कहिके गावय। अम्मा अम्मा कहि चिल्लावय।। -हेमलाल साहू  छंद साधक, सत्र -1 ग्राम - गिधवा, जिला बेमेतरा