Tuesday, 23 June 2026

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟‎

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟
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‎कागज उप्पर नाचके, पोकय मस के लीक।
‎अपन पेट खाली करे, नाव बतालव ठीक।।
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‎हरियर लुगरा ओढ़ के, ठाड़े दिन अउ रात।
‎जेठ घाम मा छाँव दे, सबके करय सहात।।
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‎रतिहा फूलय डार मा, टप टप झरय बिहान।
‎महर महर ममहाय ले, दुरिहा ले पहिचान।।
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‎एक पेड़ सीधा खड़े, छूये जाय अगास।
‎दुब्बर पातर ये रहे, आवय कामें खास।।
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‎झब्बू पूँछ उठाय के, कूदय नाचय डार।
‎करिया धारी पीठ मा, करथे चिर्र-पुकार।।
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‎काया हरियर रंग के, टप-टप कूदत जाय।
‎पानी गिरथे सनसना, टरर-टरर नरियाय।।
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‎धरती भीतर घर करे, मुँह ऊपर हे खोल।
‎प्यासा आके तीर मा, पानी पाय अमोल।।
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‎काया हरियर लाल मुख, गुरतुर बोली बान।
‎मनखे जइसन गोठिया, बूझव नाम सुजान।।
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‎रंग बिरंगी पाँख ले, फूल फूल मंडराय।
‎रस चूसे मुँह नानकुन, घूम घूम इतराय।।
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‎पानी भीतर घर करे, बिन पानी मर जाय।
‎आँखी खोले रात दिन, पलक नहीं झपकाय।।
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‎उत्तरमाला : कलम 🖋️ | रुख (पेड़)🌳 | महुआ 🌼 | बाँस 🎋 | गिलहरी 🐿️ | मेचका (मेढ़क)🐸 | कुँआ 💧 | मिट्ठू (तोता)🦜 | तितली 🦋 | मछरी (मछली)🐟
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‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा




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