🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟
❶
लुगरा हरा लपेट के, धरथे भीतर सोन।
मुड़ मा भुरवा बाल हे, बता सखी ये कोन।।
❷
बाहर पथरा कस कड़ा, गूदा मीठ भराय।
डारा-डारा मा फरय, पक्का हर ममहाय।।
❸
माटी भीतर जा घुसे, पहिरे भुरवा खोल।
घर ला फोरव ता मिले, बीजा गुरतुर गोल।।
❹
उप्पर कपड़ा एकठन, भीतर परत हजार।
दूसर रोवय खुद कटे, देवय अब्बड़ झार।।
❺
रहय सबो एकेच घर, अपन हाथ ला जोर।
खोल उतारय ता दिखे, सादा दाँत निपोर।।
❻
काया रहिथे नानकुन, रेंगय बना कतार।
खाये बर कोठी भरय, जांगर खपय अपार।।
❼
आठ पाँव धर काम ले, बुनय सुई बिन जाल।
दरजी मानय हार ला, अइसन करय कमाल।।
❽
धरय पीठ घर लाद के, घूमय दिन अउ रात।
सुस्ता-सुस्ता रेंगथे, भावय बड़ बरसात।।
❾
फूल-फूल रस बीनथे, कुरिया रखय लपेट।
गुरतुर धन भंडार रख, जग ला करदय भेंट।।
❿
पहरा देवय रात के, घटय बढ़य हर रोज।
सुकवा संगे खेलथे, नाव हवय का खोज।।
✨🌈 उत्तरमाला 🌈✨
❶🌽 भुट्टा(मकई)• ❷🍈 बेल (बेल फल)• ❸🥜 मूंगफली • ❹🧅 गोंदली(प्याज)• ❺🧄 लसुन(लहसुन )• ❻🐜 चांटी(चींटी)• ❼🕷️ मेकरा(मकड़ी)• ❽🐌 घोंघी-घोंघा • ❾🐝 मधुमक्खी • ❿🌙 चंदा(चांद)
✍️ रचनाकार – हेमलाल साहू
🐦 🪺चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
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