Monday, 22 June 2026

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟‎

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟
‎❶
‎लुगरा हरा लपेट के, धरथे भीतर सोन।
‎मुड़ मा भुरवा बाल हे, बता सखी ये कोन।।
‎❷
‎बाहर पथरा कस कड़ा, गूदा मीठ भराय।
‎डारा-डारा मा फरय, पक्का हर ममहाय।।
‎❸
‎माटी भीतर जा घुसे, पहिरे भुरवा खोल।
‎घर ला फोरव ता मिले, बीजा गुरतुर गोल।।
‎❹
‎उप्पर कपड़ा एकठन, भीतर परत हजार।
‎दूसर रोवय खुद कटे, देवय अब्बड़ झार।।
‎❺
‎रहय सबो एकेच घर, अपन हाथ ला जोर।
‎खोल उतारय ता दिखे, सादा दाँत निपोर।।
‎❻
‎काया रहिथे नानकुन, रेंगय बना कतार।
‎खाये बर कोठी भरय, जांगर खपय अपार।।
‎❼
‎आठ पाँव धर काम ले, बुनय सुई बिन जाल।
‎दरजी मानय हार ला, अइसन करय कमाल।।
‎❽
‎धरय पीठ घर लाद के, घूमय दिन अउ रात।
‎सुस्ता-सुस्ता रेंगथे, भावय बड़ बरसात।।
‎❾
‎फूल-फूल रस बीनथे, कुरिया रखय लपेट।
‎गुरतुर धन भंडार रख, जग ला करदय भेंट।।
‎❿
‎पहरा देवय रात के, घटय बढ़य हर रोज।
‎सुकवा संगे खेलथे, नाव हवय का खोज।।
‎✨🌈 उत्तरमाला 🌈✨
‎❶🌽 भुट्टा(मकई)• ❷🍈 बेल (बेल फल)• ❸🥜 मूंगफली • ❹🧅 गोंदली(प्याज)• ❺🧄 लसुन(लहसुन )• ❻🐜 चांटी(चींटी)• ❼🕷️ मेकरा(मकड़ी)• ❽🐌 घोंघी-घोंघा • ❾🐝 मधुमक्खी • ❿🌙 चंदा(चांद)
‎✍️ रचनाकार – हेमलाल साहू
‎🐦 🪺चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा

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