हेम के दोहे (बाल जनऊला–9)
मुँह दाँत जीभिया नहीं, काया पोंडा होय।
फूँक देत ता राग दे, बिना फूँक चुप सोय।।
ऊपर हे झबरा जटा, काया कठुआ पोठ।
कारी आँखी तीन ठन, भीतर गूदा रोठ।।
पानी दाना खाय नइ, पखना के जे पूत।
टकरावत चिनगी झरे, सुलगा देवय सूँत।।
उज्जर काया खोखला, फूँक परत हुंकार।
मंदिर भर गूँजत उठय, मंगल करत पुकार।।
दू अँगरी हे एक मुँह, चलथे एक्के साथ।
दहकत धरके अंगरा, मनखे बचाय हाथ।।
कुआँ नहीं पानी झरे, घाम काम ले गार।
पीये कोनो जन नहीं, हवा पाय ले हार।।
चलय नहीं दौड़य नहीं, बिना पाँव पहुँचाय।
गाँव-शहर ला जोड़ के, जग ला छोट बनाय।।
डिक्टो मनखे कस लगे, फेर चले ना साँस।
पहिरे फटहा कोट ला, काया लउठी बाँस।।
दुरिहा जावय पाँव बिन, संदेसा पहुँचाय।
ओकर मुँह नइहे तभो, जम्मो बात बताय।।
करिया धूसर रूप धर, भागत चढ़य अगास।
आँखी मा पानी भरे, खांसत निकले साँस।।
उत्तरमाला
🎶 बंसी (बासुरी)• 🥥 नरियर (नारियल )• 🪨 चकमक • 🐚 शंख • 🔥 चिमटा • 💦 पसीना • 🛣️ रद्दा (सड़क )• 🌾 पुतला • ✉️ पाती (चिट्ठी )• 🌫️ धुआँ
रचनाकार -हेमलाल साहू
चिरई के गाँव - गिधवा, जिला-बेमेतरा
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