Friday, 24 July 2026

हेम के दोहे (बाल जनऊला–9)

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–9)

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‎मुँह दाँत जीभिया नहीं, काया पोंडा होय।

‎फूँक देत ता राग दे, बिना फूँक चुप सोय।।

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‎ऊपर हे झबरा जटा, काया कठुआ पोठ।

‎कारी आँखी तीन ठन, भीतर गूदा रोठ।।

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‎पानी दाना खाय नइ, पखना के जे पूत।

‎टकरावत चिनगी झरे, सुलगा देवय सूँत।।

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‎उज्जर काया खोखला, फूँक परत हुंकार।

‎मंदिर भर गूँजत उठय, मंगल करत पुकार।।

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‎दू अँगरी हे एक मुँह, चलथे एक्के साथ।

‎दहकत धरके अंगरा, मनखे बचाय हाथ।।

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‎कुआँ नहीं पानी झरे, घाम काम ले गार।

‎पीये कोनो जन नहीं, हवा पाय ले हार।।

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‎चलय नहीं दौड़य नहीं, बिना पाँव पहुँचाय।

‎गाँव-शहर ला जोड़ के, जग ला छोट बनाय।।

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‎डिक्टो मनखे कस लगे, फेर चले ना साँस।

‎पहिरे फटहा कोट ला, काया लउठी बाँस।।

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‎दुरिहा जावय पाँव बिन, संदेसा पहुँचाय। 

‎ओकर मुँह नइहे तभो, जम्मो बात बताय।।

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‎करिया धूसर रूप धर, भागत चढ़य अगास।

‎आँखी मा पानी भरे, खांसत निकले साँस।।

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‎उत्तरमाला

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‎🎶 बंसी (बासुरी)• 🥥 नरियर (नारियल )• 🪨 चकमक  • 🐚 शंख • 🔥 चिमटा • 💦 पसीना • 🛣️ रद्दा (सड़क )• 🌾 पुतला • ✉️ पाती (चिट्ठी )• 🌫️ धुआँ

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‎रचनाकार -हेमलाल साहू

‎चिरई के गाँव - गिधवा, जिला-बेमेतरा

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