मुसवा-बिलई ठनगे लड़ई।
बिलई ऊपर मुसवा झपई।।
मुसवा कहिथे, "मौसी बिलई!
जो जीतय, ओ खावय मलई।।"
बिलई कहिथे, "आ रे दाऊ!
हार जबे ता तोला खाऊ।।"
मिलके खेलय गिल्ली-डंडा।
मुसवा रचिस नवा हथकंडा।।
बिलई डंडा घुमइस भारी।
गिल्ली उड़के घुसगे बारी।।
गिल्ली खोजत मुसवा भागिस।
ओकर पाछू बिलई आगिस।।
मौका पा जा खुसरे बिल मा।
बिलई देखत रहिगे तिर मा।।
गिल्ली-डंडा के जुग टुटगे।
मुसवा हर बिलई ले छुटगे।।
रचनाकार: हेमलाल साहू
ग्राम: गिधवा, जिला: बेमेतरा
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