Friday, 24 July 2026

‎बरखा रानी के नखरा

‎बरखा रानी के नखरा
‎बरखा रानी नखरा मारत, 
‎कूदत-नाचत आत।
‎छाता जस धर तस भींजोवत,
‎देख-देख इतरात॥
‎सड़क छोटकुन नदिया बनगे,
‎पानी बहिथे धार।
‎गाड़ी मन के पहिया थमगे,
‎धकियावय सब यार।।
‎नरवा नदिया उछलय कूदय,
‎बाँधा ठोकय ताल।
‎बरखा कहिस – "मोर दिन आइस",
‎पानी मार उछाल।।
‎कपड़ा धोके डारिन बाहर,
‎बरखा देइस मात।
‎घमुआ आके झाँकिस थोकिन,
‎फेर गिरिस बरसात।।
‎हेम कहिस सुन बरखा रानी,
‎थोरिक धरव धियान।
‎थोरिक नखरा कम कर देबे,
‎हाँसत रहय किसान।।
‎रचनाकार-हेमलाल साहू
‎गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा

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