हमर बबा हे बिक्कट भुलहा, घर के पहरादार।
चश्मा पहिरे चश्मा खोजय, सबला देय पुकार।।
मेछा अइठत तेवर देवय, बनथे बड़ सरदार।
जेबे भीतर चाबी रहिथे, छानय घर-कोठार।।
बड़का मुसवा मार गिराइस, बनगे बड़का शेर।
काँधा ऊपर गमछा धरके, गमछा खोजय फेर।।
दाई कहिस नून ले आबे, नाती ला ले साथ।
नून के जगा चीनी लेलिस, दाई धरिसे माथ।।
बबा पटफटी लेके निकरिस, जब्बर झाड़य शान।
एक जगा मा छोड़ पटफटी, खोजय हो हलकान।।
मोबाइल ला दाई ला दे, खोजत घर भर आय।
दाई धर मोबाइल बइठे, घर भर हाँसी छाय।।
पनही पहिरे ठसक दिखावय, बनके राजा भोज।
पनही पहिरे पनही खोजय, घर भर हाँसी रोज।।
जब्बर छाती, ऊँचा काठी, बड़ हिम्मतहा आय।
हाथे लाठी धरके पूछय – "लाठी कहाँ मढ़ाय?"।।
रोज नवा किस्सा रच देवय, हाँसय घर-परिवार।
हमर बबा हे बिक्कट भुलहा, रखथे मया-अपार।।
रचनाकार - हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा
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