❶
दुब्बर पतली कमरिया, तीखा ओकर धार।
लकर-धकर ले काट दे, ठाढ़े धान जुआर।।
❷
गोड़ हाथ अउ मुँह नहीं, बाँधे सौ-सौ गाँठ।
बइला बोझा खाट संग, गाढ़ा रहिथे साँठ।।
❸
तीन जीव के संग ले, चलथे एक्के ओर।
खरर-खरर ले जोत के, धरती सीना फोर।।
❹
पतली-पसली बाँस के, गूँथय गोल लपेट।
ऊपर ढक्कन दाब के, भीतर रखय समेट।।
❺
दूठन डंडा गोड़ जस, पइदान ले बनाय।
एक्को पाँव उठाय ना, सबला सरग चढ़ाय।।
❻
सौ-सौ दुवार एक घर, सबो रहँय परिवार।
फूलन रसा बटोर के, भरँय अपन भंडार।।
❼
बिन करघा बिन सूत के, गजबे कारीगार।
तिनका-पाना जोड़ के, बुन देवय घरबार।।
❽
डारा ऊपर बइठ के, बदलत रंग हजार।
फेंके झटले जीभिया, फटले धरे शिकार।।
❾
चोंचकु मुँह तन नानकुन, हिम्मत रखय अपार।
ठक-ठक रुख मा छेद कर, पावय अपन अहार।।
❿
बादर ले पानी गिरे, फुटथे छतरी तान।
ना बीजा रोपा लगे, करले तँय पहिचान।।
🌈 उत्तरमाला 🌈
❶ 🔪 हँसिया • ❷ 🪢 रस्सी • ❸ 🚜🐂 नागर (हल) • ❹ 🧺 झाँपी • ❺ 🪜 निसैनी (सीढ़ी) • ❻ 🐝🍯 मधुमक्खी के छत्ता • ❼ 🐦🪺 बया चिरई के घोंसला • ❽ 🦎 गिरगिट • ❾ 🐦🌳 कठखोलवा (कठफोड़वा) • ❿ 🍄 पिहरी (कुकुरमुत्ता)
✍️ रचनाकार – हेमलाल साहू
📍 चिरई के गाँव – गिधवा, जिला – बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
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