अपन देस बर जीबो मरबो, हमला हवय गुमान।
ए भारत के लाज रखे बर, अरपन तन-मन प्रान।।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, एक देस के फूल।
मया-दया ले महकय बगिया, सुमता हावे मूल।।
पूरब पच्छिम उत्तर दक्खिन, एक देस के जान।
सीमा के रखवारी करबो, बनके अमर जवान।।
हवै भरोसा ए जाँगर मा, करथन जी भर काज।
माटी ले हमर बने चोला, रखथन माटी लाज।।
दाई के जयकारा गावत, चलथन सीना तान।
बइरी कतको आवै संगी, रहिबो बन चट्टान।।
देस के वीर नारायण जस, जनमिन बड़का वीर।
भारत दाई बर लड़त-लड़त, हाँसत सहिगे पीर।।
डॉक्टर खूबचंद बघेल हा, हमर राज के शान।
स्वाभिमान के दीया बारिस, देस बढ़ाइन मान।।
आजादी बर लड़िन वीर मन, रखिन देस के मान।
ब्रिटिश राज ला मार भगाइन, गूँजिस हिन्दुस्तान।।
हवन हमन माटी के बेटा, माटी ले पहिचान।
तीन रंग ले सजे तिरंगा, हमर देस के शान।।
रचनाकार-हेमलाल साहू
गाँव-गिधवा, जिला बेमेतरा (छ. ग.)
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