वीणा धारी माँ सरस्वती,
लेके आयव आस।
नान्हे-नान्हे लइका हावन,
भर दे नवा उजास।।
सूरज चंदा फूल चिरैयाँ,
बाँटत मया-दुलार।
नान्हे मन ला विद्या देवव,
सपना दे आकार।।
ज्ञान के बार दीया दाई,
दूर होय अँधियार।
दया-मया अउ भलई ले,
महका दे दुआर।।
रचनाकार -हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा
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