Saturday, 13 June 2026
जुगनू राजा
Friday, 5 June 2026
साइकिल
पहली रहिस साइकिल, घर के शान।
रहय अपन घर के ओ, बन पहिचान।।
दीदी नोनी बाबू, सबो सियान।
दाई बबा चलावय, सबो जवान।।
कम खर्चा पानी मा, चलय गुजार।।
दौड़य गली खोर अउ, सब संसार।।
ट्रिन ट्रिन बजाय घंटी, देय धियान।
लान साइकिल लेवय, काम किसान।।
पगडंडी मा भागय, बड़ रफ्तार।
गाँव शहर ला घूमे, पैडिल मार।।
एक एक पैडिल के, खूब धमाल।
तोर बना सेहत ला, करय कमाल।।
डीजल तेल के नहीं, बनय गुलाम।
मिहनत बदला सेहत, मिलय इनाम।।
बिना प्रदूषण दौड़ा, इहि जग सार।
चला साइकिल करलव, मया दुलार।।
रचनाकार - हेमलाल साहू
Sunday, 31 May 2026
हेम के कुण्डलियाँ (सच)
सच बोली मा रूठथे, झूठन जग पतियाय।
पर हेमलाल सच कहे, चाहे जिवरा जाय।।
चाहे जिवरा जाय, साँच बोली सुखदाई।
झूठ लबारी तोर, कभू टीकय ना भाई।।
गुनके चुनके बोल, लगालव सच के चोली।
अपने स्वारथ छोड़, सदा सच बोलव बोली।।
- हेमलाल साहू
Wednesday, 27 May 2026
*सीखव गिनती*
सीखव गिनती
आवव संगी सीखव गिनती।
मुनिया बबलू करथे बिनती।।
एक मया के ममता दाई।
दूध पान मा हवय भलाई।।
दू आँखी ले देखे मुनिया।
रंग बिरंगी हावय दुनिया।।
तीन रंग मा सजे तिरंगा।
देश प्रेम अउ हे मन चंगा।।
चार मास के बरसा पानी।
गाँव-गाँव मा करे किसानी।।
पाँच उंगरी एक हथेली।
मया-दया ला बाँट सहेली।।
छह ऋतु आवय बारी-बारी।
अपन रंग ले धरती सारी।।
सात सुरों मा गीत बनालव।
पेटी तबला संग बजालव।।
आठ पाँव के मकड़ी रानी,
जाल बुनय सारी जिनगानी।।
नौ दुवार के हावय काया।
बसथे उहाँ मोह अउ माया।।
दस उँगरी दू हाथ लगालव।
एक संग ले काम करालव।।
गिनती सीखव ज्ञान बढ़ावव।
पढ़-लिख के जिनगी चमकावव।।
-हेमलाल साहू
गाँव-गिधवा, जिला-बेमेतरा
Monday, 12 August 2024
रिमझिम बरसे पानी
बाल कविता
रिमझिम बरसे पानी
हेम के चौपाई छंद
रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी।
चम-चम चमके बिजुरी रानी।।
कड़-कड़ कड़के बादल भैया।
नाचय मछरी ता-ता थैया।।
छाय घटा हे करिया-करिया।
भर जाहीं सब नरवा-नदिया।।
होके मगन मयूरी नाचय।
सबो परानी मन हरसावय।।
टर्र-टर्र मेढ़क नरियावय।
पानी पाके उछलत जावय।।
छाही जग मा अब हरियाली।
देख केकड़ा पीटत ताली।।
बरखा देवय नव जिनगानी।
हरियर होवय धरती रानी।।
रचनाकार : हेमलाल साहू
ग्राम : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
Monday, 11 July 2022
स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद)
स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद)
स्कूल पढ़े बर जाहूँ मोला,
पकड़ा दे तँय बस्ता।
कहिथे नोनी हर बाबू ला,
बता स्कूल के रस्ता।।
भर्ती मोला आज करा दे,
स्कूल रोज मँय जाहूँ।
सुनले विनती मोरो बाबू,
सुघ्घर विद्या पाहूँ।।
पढ़ई-लिखई मा जोर लगा,
हरदम अव्वल रइहूँ।।
खेल-कूद ले मन रख चंगा,
सबले आगू बढ़हूँ।।
पट्टी मा खड़िया ले खींचवँ,
चंदा सूरज तारा।
पोथी मा मोर मुकुट बना के,
रंग-रंग के धारा।।
आखर आखर गुन-गुन के मँय,
पन्ना-पन्ना लिखहूँ।
विद्या के जोत जगा मन मा,
जिनगी ला मँय गढ़हूँ।।
खुरमी चीला बरा ठेठरी,
मुर्रा ले के जाहूँ।
खाना छुट्टी बेर बाँट के,
संगी साथी सँग खाहूँ।।
अपन स्कूल मा होशियार बन,
जग मा नाम कमाहूँ।
मास्टर जी कस ज्ञान सीख के,
सबला रोज पढ़ाहूँ।।
पढ़ई लिखई भविष्य कुंजी।
हमर ज्ञान जिनगी के पूँजी।।
रचनाकार- हेमलाल साहू
गाँव -गिधवा, जिला बेमेतरा
फुग्गा वाले (हेम के चौपाई छंद)
🐸 मेचका (बाल कविता)
🐸 मेचका (बाल कविता) टप-टप बरसे सुग्घर पानी, नान्हे मन ला भावय। गात मया के गीत मेचका, टर्र-टर्र ले टर्रावय।। उत्ताधुर्रा जीभ लमावय...
सबले ज्यादा पढ़े गिस
-
स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद) स्कूल पढ़े बर जाहूँ मोला, पकड़ा दे तँय बस्ता। कहिथे नोनी हर बाबू ला, बता स्कूल के रस्ता।। ...
-
पेड़ लगावय (शंकर छंद) चुन्नी मुन्नी सोना बबलू, होय झट तैयार। धरके रापा कुदरी झउहाँ, जाय तरिया पार।। जुरमिल पेड़ लगावय बढ़िया, घेर...
-
रक्त करवल दान (हेम के शंकर छंद) बात बतावँत हावय चुन्नी, रक्त करलव दान। दूर भगालँव मन के डर ला, होय ना नुकसान।। तन-मन हा तोर स्वस...