रंग बिरंगी तितली रानी।
घूमय फीरय पीयय पानी।।
सुघ्गर हावै सबले प्यारी।
दिखते जैसे राजकुमारी।।
फूल तीर मा रहिथे डेरा।
पता चले ना कहाँ बसेरा?
सबो फूल के रस ला चुहकय।
हवा संग उड़ उड़ के कुलकय।।
तितली लइका के मन भावय।
ओला अपन तीर जब पावय।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र-1
ग्राम- गिधवा, जिला-बेमेतरा
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