भालू भैया
चम्पा, सोना, मोना, मुनिया,
डोलू, भोलू अउ राजू।
भालू भैया के सुन कहनी,
सुग्घर बैठ एक बाजू।।
रहे रंग मा करिया भुरुवा
सदा मस्त मंगन भालू।
बड़का बड़का पँजा हाथ के,
रहिथे सबले ये चालू।।
नदिया-नरवा के मछली ला,
भोजन अपन बनाथे।
मधुरस पी रुखराई के फर,
टोर-टोर अब्बड़ खाथे।।
नदिया-नरवा के पानी मा,
मंगन हो खूब नहाथे।
खेल-कूद करके जंगल मा,
जिनगी ला अपन पहाथे।।
बन-बन घूमय फिरय अकेला,
लटक पड़े मा ये सोथे।
दुख पीरा मा भालू भैया,
मनखे जस भारी रोथे।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक, सत्र-01
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा
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