बाल कविता
भालू भैया
हेम के त्राटक छंद
भालू कालू के सुन कहनी,
सुग्घर बैठ एक बाजू।
चम्पा, सोना, मोना, मुनिया,
डोलू, भोलू अउ राजू।।
हवय रंग मा करिया भुरुवा।
रहिथे सदा मगन भालू।
बड़का-बड़का पँजा हाथ के,
होसियार हावय कालू।।
मधुरस बड़ा चाव ले पीके,
ओखर पेट अघाथे।
रुख-राई ले टोर-टोर फर,
भोजन अपन बनाथे।।
नदिया-नरवा के पानी मा,
कूदत मगन हो नहाथे।
खेलत-कूदत जंगल मा,
जिनगी हँसत पहाथे।।
जंगल घूमय फिरय अकेला,
रुख छइँहा सुस्ताथे।
दुख पीरा मा भालू भैया,
मनखे जस भारी रोथे।।
रचनाकार : हेमलाल साहू
ग्राम : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
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