खेलव संगी (चौपाई छंद)
खेलय संगी बाँटी भौरा।
राउत पारा, दाऊ चौरा।।
बगड़ू, बल्ला, दल्लू-बल्लू।
आय संग मा बंटी, लल्लू।।
खोखो खेल कबड्डी फुगड़ी।
सोना-मोना बन के जुगड़ी।।
रेस टीप खेलय पचरंगा।
दाम देत ले रोवय गंगा।।
घांदी मुंदी गिल्ली डण्डा।
नवा-नवा खेले के फंडा।।
खेल-खेल मा होथे योगा।
तन मन होवै पोठ निरोगा।।
-हेमलाल साहू
छन्द साधक, सत्र -1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा
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