आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद)
आजा-आजा बरखा रानी।
इहाँ गिरादे झटकुन पानी।।
सुरुज देव आगी फेंकत हे।
हरर हरर सब ला सेंकत हे।।
घाम जनावत हावय भारी।
लू मा उपजत हे बीमारी।।
तरिया नदिया सबो अँटागे।
कुँआ बावली सबो सुखागे।।
सुख्खा के आगी तड़पावत।
हैंडपंप घलो लड़खड़ावत।।
टैंकर आगू नाच लगावत।
पानी बर रोजे कल्लावत।।
बोरवेल के मोटर हाँफय।
पानी बिन मशीन हा काँपय।।
नल-जल के पाइप रोवत हे।
पेड़ काट मनखे सोवत हे।।
छोड़व बरखा आना-कानी।
तरसत हावँय सबो परानी।।
दिखही कब ये बदरी कारी।
आही कब तोर इहाँ बारी।।
आजा कँसके मार झकोरा।
हावँय सब ला तोर अगोरा।।
फेर मया बरखा बरसादे।
कारी-कारी बदरी ला दे।।
टर्र मेचका राग सुनाही।
खेती खार फेर हरियाही।।
तरिया नदिया उफान मारे।
दाई आँखी अँसुवन ढारे।।
रचनाकार-हेमलाल साहू
गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा
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