Friday, 10 June 2022

*आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद)

‎आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद)
‎आजा-आजा बरखा रानी।
‎इहाँ गिरादे झटकुन पानी।।
‎सुरुज देव आगी फेंकत हे।
‎हरर हरर सब ला सेंकत हे।।
‎घाम जनावत हावय भारी।
‎लू मा उपजत हे बीमारी।।
‎तरिया नदिया सबो अँटागे।
‎कुँआ बावली सबो सुखागे।।
‎सुख्खा के आगी तड़पावत।
‎हैंडपंप घलो लड़खड़ावत।।
‎टैंकर आगू नाच लगावत।  
‎पानी बर रोजे कल्लावत।।  
‎बोरवेल के मोटर हाँफय।
‎पानी बिन मशीन हा काँपय।।
‎नल-जल के पाइप रोवत हे।
‎पेड़ काट मनखे सोवत हे।।
‎छोड़व बरखा आना-कानी।
‎तरसत हावँय सबो परानी।।
‎दिखही कब ये बदरी कारी।
‎आही कब तोर इहाँ बारी।।
‎आजा कँसके मार झकोरा।
‎हावँय सब ला तोर अगोरा।।
‎फेर मया बरखा बरसादे।
‎कारी-कारी बदरी ला दे।।
‎टर्र मेचका राग सुनाही। 
‎खेती खार फेर हरियाही।।
‎तरिया नदिया उफान मारे।  
‎दाई आँखी अँसुवन ढारे।।
‎रचनाकार-हेमलाल साहू
‎गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा 

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