*आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद)
आजा-आजा बरखा रानी।
इहाँ गिरादे झटकुन पानी।।
सुरुज देव आगी फेंकत हे।
हरर हरर सब ला सेंकत हे।।
घाम जनावत हावय भारी।
लू मा लगत हवय बीमारी।।
तरिया, नदिया सबो अँटागे।
कुँआ, बावली सबो सुखागे।।
छोड़व बरखा आना-कानी।
तरसत हावँय सबो परानी।।
दिखही कब ये बदरी कारी।
आही कब तोर इहाँ बारी।।
आजा कँसके मार झकोरा।
हावँय सब ला तोर अगोरा।।
-हेमलाल साहू
छन्द साधक, सत्र -1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा
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