(बरवै छंद) बाल कविता
हावय बड़ उपयोगी, परसा पेड़।
पाबे खेत-खार के, सुघ्घर मेड़।।
आथे डारा-पाना, जड़-फर काम।
रोग भगाये तन ले, दै आराम।।
सबो जीव के बनथे, सुघ्घर ठाँव।
बचा घाम ले सब ला, देवय छाँव।।
बड़का-बड़का लावँय, पाना टोर।
तुनथें पतरी-दोना, कड़गी जोर।।
फर टोर कमाले तँय, पैसा चार।
औषधि बर बीकय, हाट-बजार।।
रुख के जर ले निकलै, कुंवर बाख।
बड़ गुणकारी हावय, एखर लाख।।
रचनाकार-हेमलाल साहू
गाँव-गिधवा, जिला बेमेतरा
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