Friday, 10 June 2022

*परसा पेड़ (बरवै छंद)*

‎🌳 पसरा पेड़ (पलाश)
‎(बरवै छंद) बाल कविता 
‎हावय बड़ उपयोगी, परसा पेड़।
‎पाबे खेत-खार के, सुघ्घर मेड़।।
‎आथे डारा-पाना, जड़-फर काम।
‎रोग भगाये तन ले, दै आराम।। 
‎सबो जीव के बनथे, सुघ्घर ठाँव।
‎बचा घाम ले सब ला, देवय छाँव।।
‎बड़का-बड़का लावँय, पाना टोर।
‎तुनथें पतरी-दोना, कड़गी जोर।।
‎फर टोर कमाले तँय, पैसा चार।
‎औषधि बर बीकय, हाट-बजार।।
‎रुख के जर ले निकलै, कुंवर बाख।
‎बड़ गुणकारी हावय, एखर लाख।।
‎रचनाकार-हेमलाल साहू
‎गाँव-गिधवा, जिला बेमेतरा

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