Thursday, 9 June 2022

कहिथे पुस्तक

‎बाल कविता
‎कहिथे पुस्तक
‎(सरसी छंद)
‎कहिथे पुस्तक चिंकी, पिंकी,
‎बन जा साथी मोर।
‎पढ़ के मोला सुरता रखबे,
‎काम आँव मँय तोर।।
‎अनगिन बात समोय हवँव मँय,
‎दुनिया भर के ज्ञान।
‎पढ़त-पढ़त बन जाबे संगी,
‎तँय बड़का विद्वान।।
‎पन्ना-पन्ना मोर पलट के,
‎पढ़ के लेबे देख।
‎पाबे नाटक, कहनी, कविता,
‎सुघ्घर-सुघ्घर लेख।।
‎डॉक्टर, मास्टर अउ वकील बर,
‎मोर सहारा लेत।
‎दुनिया भर के मनखे मन ला,
‎बढ़िया सेवा देत।।
‎भगवद्गीता रामायण मँय,
‎चारो वेद पुरान।
‎रग-रग मा मोर बसे हावय,
‎आखर बन भगवान।।
‎गौरव गाथा मँय अतीत के,
‎सबो समाये काल।
‎पढ़के जानव भविष्य अउ
‎वर्तमान के हाल।।
‎मोबाइल युग मा झन करहूँ,
‎मोला टाल-मटूल।
‎पढ़-लिख के मोरो रख लेहूँ,
‎बचाय रखहूँ मूल।।
‎रचनाकार : हेमलाल साहू
‎ग्राम : गिधवा, जिला : बेमेतरा (छत्तीसगढ़)

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