घुघु-घूँ करथें रतिहा उल्लू।
सुनके झट उठे कुकुर कल्लू।।
बड़का-बड़का आँखी भारी।
रतिया आवय घट अँधियारी।।
कतको मनखे डर मा काँपय।
पाछू भाग कुकुर हर हाँफय।।
भौं-भौं करके कुकुर भगाथे।
तब नींद सबो ला आ पाथे।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र-1
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा
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