Wednesday, 1 June 2022

ओस के बूँद (चौपाई छंद)

ओस के बूँद (चौपाई छंद)

चमक दमक जस हीरा-मोती।
होत बिहनिया चारो-कोती।।

रहिथें माड़ा काँदी पाना।
बनके सुघ्घर मोती दाना।।

रेंगे उघरा हो बिन चप्पल।
ओकर सबो रोग दै गप्पल।।

सुरुज देव जस बेरा टाँगे।
देख-देख ओला जा भागे।।

जल्दी का हे नाम बताना।
तोला देंहू खई खजाना।।

-हेमलाल सह
छंद साधक सत्र-१
ग्राम गिधवा, जिला - बेमेतरा

No comments:

Post a Comment

‎🐸 मेचका (बाल कविता)‎

‎🐸 मेचका (बाल कविता) ‎ ‎टप-टप बरसे सुग्घर पानी, ‎नान्हे मन ला भावय। ‎गात मया के गीत मेचका, ‎टर्र-टर्र ले टर्रावय।। ‎ ‎उत्ताधुर्रा जीभ लमावय...

सबले ज्यादा पढ़े गिस