मेला (हेम के चौपाई छंद)
गाँव तीर मा जूनी मेला।
हवय भराये रेलम पेला।।
सब्बो डहर लगे हे ठेला।
बेचत अंगूर सेब केला।।
बाबू कहिथे सोना-मोना।
हाथ पकड़ ले नइहे खोना।
हावय भारी भीड़ भड़क्का।
खावै सब्बो धक्कम धक्का।
अल्ली ले नरियल के भेला।
देख चढ़ावँय सुमर भगेला।।
देखत मोना खई खजेना।
बाबू ला बोलत कुछु लेना।।
रंग बिरंगी अउ चितरंगी।
फुग्गा लेवय सब्बो संगी।
झूले खूब ढेलवा सोना।
खेलवना ले मंगन मोना।।
-हेमलाल साहू
छंद साधक, सत्र-१
ग्राम-गिधवा, जिला बेमेतरा
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