Sunday, 19 June 2022

गिधवा के गाँव (सरसी छंद)

‎गिधवा के गाँव (सरसी छंद)

‎हवय शहर ले कतका बढ़िया,
‎गिधवा के रे गाँव।
‎माटी-खपरा घर सुग्घर,
‎मया भरे हर ठाँव।।

‎सुरुज देव के होत बिहनिया,
‎जगमग होवय गाँव।
‎हरियर-हरियर डारा-पाना,
‎रुखराई के छाँव।।

‎चिरई-चुरगुन घूमत हावय,
‎डेना अपन पसार।
‎अब्बड़ निक लगथे सबला रे,
‎तरिया-नदिया पार।।

‎जिहाँ किसानी मा जिनगानी,
‎सुग्घर खेती-खार।
‎माहामाया दाई देवत,
‎अन्न-धन्न भंडार।।

‎छोटे-छोटे लगथे बढ़िया,
‎जिहाँ हॉट-बाजार।
‎तौल-मोल करके ले ले तँय,
‎सबला छाँट-निमार।।

‎दाई, काकी, दादी, बहिनी,
‎सबके मया-दुलार।
‎बाबू, कका, बबा अउ भैया,
‎हिम्मत देय अपार।।

‎समरसता के दीया बारय,
‎दूर करँय अँधियार।
‎भेद-भाव ला दूर भगावय,
‎बाँधय सुमता पार।।

‎बाबू कहिथे बबलू रोशन,
‎महिमा गावत जावँ।
‎सबले सुग्घर हावय बेटा,
गिधवा के रे गाँव।।

‎रचनाकार -हेमलाल साहू
‎गाँव - गिधवा, जिला- बेमेतरा


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