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गुल्लू के गाँव (सरसी छंद)

गुल्लू के गाँव (सरसी छंद)

कतका बढ़िया हवय शहर ले 
गुल्लू के रे गाँव।।
कच्चा-पक्का छाँही-खपरा,
अलवा-जलवा ठाँव।।

सुरुज देव के होत बिहनिया,
जिहाँ परत हे पाँव।
हरियर-हरियर डारा-पाना, 
रुखराई के छाँव।।

चिरई-चुरगुन घूमत हावय,
डेना अपन पसार।
अब्बड़ निक लागे सबला रे,
तरिया नदिया पार।।

जिहाँ किसानी मा जिनगानी,
सुग्घर खेती खार।
माहामाया दाई देवत,
अन्न-धन्न भंडार।।

छोटे-छोटे लगथे बढ़िया,
जिहाँ हॉट बाजार।
तौल मोल करके ले ले तँय,
सब ला छाँट निमार।।

दाई, काकी, दादी, बनही,
सबके मया दुलार।
बाबू, कका, बबा अउ भैया,
हिम्मत देत अपार।।

समरसता के दीया बारय,
दूर करँय अँधियार
भेद-भाव ला दूर भगावय,
बाँधय सुमता पार।।

सबले सुघ्गर हावय बेटा,
गुल्लू के रे गाँव।
कहिथे बाबू, बबलू रोशन,
कतका मँय दुहराँव।।

-हेमलाल साहू
छंद साधक सत्र -१
ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा।

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स्कूल पढ़े बर जाहूँ (हेम के सार छंद) स्कूल पढ़े बर जाहूँ मोला, पकड़ा दे तँय बस्ता। कहिथे नोनी हर बाबू ला, बता स्कूल के रस्ता।। भर्ती मोला आज करा दे, स्कूल रोज मँय जाहूँ। सुनले विनती मोरो बाबू, सुघ्गर विद्या पाहूँ।। पढ़ई-लिखई मा मँय हर, सबले अव्वल रइहूँ।। खेल-कूद मा मन चंगा रख, सबले आगू बढ़हूँ।। जोड़-घटाना गुना-भाग कर, गिनती ला मँय गिनहूँ। आखर-आखर ला पढ़-पढ़ के, सीख-सीख मँय लिखहूँ।। अपन स्कूल मा होशियार बन, कसके धाक जमाहूँ। डॉक्टर, मास्टर बन वकील महुँ, जग मा नाम कमाहूँ।। - हेमलाल साहू छंद साधक, सत्र-१ ग्राम-गिधवा, जिला-बेमेतरा

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