Wednesday, 24 June 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–6)‎

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–6)
‎
‎सादा कपड़ा ओढ़ के, धरथे साधू भेस।
‎पानी भीतर झाँकके, झटले धर लीलेस।।
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‎गलती ला गप्पल जथे, कबो नहीं चिचियाय।
‎कागज उप्पर फेर दे, सबो साफ हो जाय।।
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‎घर के आगू ठाढ़ हे, चौड़ा सीना तान।
‎पहरा देवय रात दिन, का हे नाव सुजान।।
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‎सोना जइसन रंग हे, किसान रखय समेट।
‎पूजा करय किसान मन, भरथे कोठी पेट।।
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‎रतिहा परदा फार के, लावय नवा बिहान।
‎तोर बिना जग कुछु नहीं, बूझव नाव सियान।।
‎
‎पानी पीके जीय थे, बिन पानी अइलाय।
‎पटकू ला ओढ़े हरा, अँगना भर मुस्काय।।
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‎बड़े-बड़े ले मूछ हे, छोट जीव के काल।
‎दबके बइठे ताकथे, धीरज चतुरा चाल।।
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‎करिया काया नानकुन, चोककु लम्बा दाँत।
‎कुतर-कुतर के धान खा, ची-ची करथे बात।।
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‎लकड़ी रस्सी देह हे, एक चलय ना पाँव।
‎लेटत भर ले नींद दे, बूझव ओकर नाव।।
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‎नइ उड़य ओ अगास मा, फेर पाँख हे चार।
‎फरफर-फरफर घूम के, देय पसीना मार।।
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‎उत्तरमाला 
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‎🐦 कोकड़ा (बगुला) | ✏️ मेटली (रबर) | 🚪 कपाट (दरवाजा) | 🌾 धान | ☀️ सूरज | 🌱 पौधा | 🐱 बिलई (बिल्ली) | 🐭 मुसवा (चूहा) | 🛏️ खटिया(खाट)| 🌬️ पंखा
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‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
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Tuesday, 23 June 2026

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟‎

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟
‎
‎कागज उप्पर नाचके, पोकय मस के लीक।
‎अपन पेट खाली करे, नाव बतालव ठीक।।
‎
‎हरियर लुगरा ओढ़ के, ठाड़े दिन अउ रात।
‎जेठ घाम मा छाँव दे, सबके करय सहात।।
‎
‎रतिहा फूलय डार मा, टप टप झरय बिहान।
‎महर महर ममहाय ले, दुरिहा ले पहिचान।।
‎
‎एक पेड़ सीधा खड़े, छूये जाय अगास।
‎दुब्बर पातर ये रहे, आवय कामें खास।।
‎
‎झब्बू पूँछ उठाय के, कूदय नाचय डार।
‎करिया धारी पीठ मा, करथे चिर्र-पुकार।।
‎
‎काया हरियर रंग के, टप-टप कूदत जाय।
‎पानी गिरथे सनसना, टरर-टरर नरियाय।।
‎
‎धरती भीतर घर करे, मुँह ऊपर हे खोल।
‎प्यासा आके तीर मा, पानी पाय अमोल।।
‎
‎काया हरियर लाल मुख, गुरतुर बोली बान।
‎मनखे जइसन गोठिया, बूझव नाम सुजान।।
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‎रंग बिरंगी पाँख ले, फूल फूल मंडराय।
‎रस चूसे मुँह नानकुन, घूम घूम इतराय।।
‎
‎पानी भीतर घर करे, बिन पानी मर जाय।
‎आँखी खोले रात दिन, पलक नहीं झपकाय।।
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‎उत्तरमाला : कलम 🖋️ | रुख (पेड़)🌳 | महुआ 🌼 | बाँस 🎋 | गिलहरी 🐿️ | मेचका (मेढ़क)🐸 | कुँआ 💧 | मिट्ठू (तोता)🦜 | तितली 🦋 | मछरी (मछली)🐟
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‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा




Monday, 22 June 2026

हेम के दोहे (बाल जनऊला 4)

‎ हेम के दोहे (बाल जनऊला 4) 
‎
‎डेरा रहय अगास मा, पाँव बिना चल जाव।
‎काँवर मा पानी भरे, गाँव-गाँव बरसाव।।
‎
‎लेवय जनम पहाड़ मा, पालय पोसय गाँव।
‎भुइयाँ मा इतरात चल, सागर मा मिल जाव।।
‎
‎करिया टूरा नानकुन, पीसत चकना चूर।
‎नाक चढ़य ता छींक दे, महिमा हे भरपूर।।
‎
‎दाँत नहीं पर काट दे, झटकुन देवय फाँक।
‎दू पल्ला बिन सून हे, बूझव थोकुन झाँक।।
‎
‎दुब्बर पातर नानकुन, मुँह मा चोखा धार।
‎लकर धकर ले कूद के, कपड़ा कर तैयार।।
‎
‎रतिहा बुग-बुग ले बरय, रुख राई मा बास।
‎बिन बाती बिन तेल के, जगमग करथे खास।।
‎
‎करिया काया ला धरे, कउवा जस झन मान।
‎बइठे रुख के डार मा, गावय गुरतुर गान।।
‎
‎हीरा अउ मोती नहीं, भिनसरहा के हार।
‎माड़ा हरियर पान मा, फबथे बड़ सिंगार।।
‎
‎बिन आगी उठथे धुआँ, भिनसरहा ले छाय।
‎सुरुज ददा ला देख के, लटपट सरकत जाय।।
‎
‎माटी ले काया बनय, सुग्घर गोल मटोल।
‎सस्ता फ्रिज गरीब के, पानी रखय अमोल।।
‎
‎🌈 उत्तरमाला 🌈
‎
‎❶ बादर (बादल) ❷ नदिया (नदी) ❸ बटुरा मरिच(काली मिर्च) ❹ कैंची ❺ सुई ❻ जुगनू ❼ कोयल ❽शीत (ओस) ❾ कुहरा (कोहरा) ❿ करसा(मटका)
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रचनाकार – हेमलाल साहू
‎पक्षी विहार गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
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‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟‎

‎
‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟
‎
‎❶
‎लुगरा हरा लपेट के, धरथे भीतर सोन।
‎मुड़ मा भुरवा बाल हे, बता सखी ये कोन।।
‎
‎❷
‎बाहर पथरा कस कड़ा, गूदा मीठ भराय।
‎डारा-डारा मा फरय, पक्का हर ममहाय।।
‎
‎❸
‎माटी भीतर जा घुसे, पहिरे भुरवा खोल।
‎घर ला फोरव ता मिले, बीजा गुरतुर गोल।।
‎
‎❹
‎उप्पर कपड़ा एकठन, भीतर परत हजार।
‎दूसर रोवय खुद कटे, देवय अब्बड़ झार।।
‎
‎❺
‎रहय सबो एकेच घर, अपन हाथ ला जोर।
‎खोल उतारय ता दिखे, सादा दाँत निपोर।।
‎
‎❻
‎काया रहिथे नानकुन, रेंगय बना कतार।
‎खाये बर कोठी भरय, जांगर खपय अपार।।
‎
‎❼
‎आठ पाँव धर काम ले, बुनय सुई बिन जाल।
‎दरजी मानय हार ला, अइसन करय कमाल।।
‎
‎❽
‎धरय पीठ घर लाद के, घूमय दिन अउ रात।
‎सुस्ता-सुस्ता रेंगथे, भावय बड़ बरसात।।
‎
‎❾
‎फूल-फूल रस बीनथे, कुरिया रखय लपेट।
‎गुरतुर धन भंडार रख, जग ला करदय भेंट।।
‎
‎❿
‎पहरा देवय रात के, घटय बढ़य हर रोज।
‎सुकवा संगे खेलथे, नाव हवय का खोज।।
‎
‎✨🌈 उत्तरमाला 🌈✨
‎❶🌽 भुट्टा(मकई)• ❷🍈 बेल (बेल फल)• ❸🥜 मूंगफली • ❹🧅 गोंदली(प्याज)• ❺🧄 लसुन(लहसुन )• ❻🐜 चांटी(चींटी)• ❼🕷️ मेकरा(मकड़ी)• ❽🐌 घोंघी-घोंघा • ❾🐝 मधुमक्खी • ❿🌙 चंदा(चांद)
‎
‎✍️ रचनाकार – हेमलाल साहू
‎🐦 🪺चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
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‎

Saturday, 20 June 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)

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‎हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)
‎
‎रतिहा आवय काम मा, बटन मसक दे थोर।
‎रहिथे चुप अरझे परे, लावय बड़ अंजोर।।
‎
‎नान-नान धर दाँत मा, सुलझा देवय केस।
‎उलझन ला दुरिहा भगा, बूझव येकर भेस।।
‎
‎करिया काया ला धरे, पहिरे उप्पर कोट।
‎उज्जर पन्ना ला भरे, होवत जावय छोट।।
‎
‎मुड़ मा नाचे पाँव बिन, तन के तानय तार।
‎बरखा चाहे घाम हो, बन जावय रखवार।।
‎
‎झूठ कपट रखथे कहाँ, सच के देथे साथ।
‎जइसे ला तइसे दिखा, धरय जेन हा हाथ।।
‎
‎नान नान कड़गी जुरे, जेकर पाँव हजार।
‎कचरा दुश्मन तोर ये, खेदय घर के पार।।
‎
‎दून्नो संगी एक हो, जावय खेती खार।
‎काँटा खूँटी ले बचा, सेवा देय अपार।।
‎
‎पोथी कापी ला भरे, अपन पेट भंडार।
‎नोनी बाबू संग चल, बनके पक्का यार।।
‎
‎दूठन चक्का ले चले, कसरत के ये खेल।
‎पैसा हर बांचय घलो, अपन पाँव ले पेल।।
‎
‎नइहे मुँह ता बोलथे, निकले तोर पुकार।
‎टन-टन करके सोर दे, हो जावय तैयार।।
‎
‎उत्तर : १. बल्ब (बिजली बत्ती) 💡 | २. कंघी 🪮 | ३. पेंसिल ✏️ | ४. छाता ☂️ | ५. आईना (दर्पण) 🪞 | ६. झाड़ू 🧹 | ७. पनही-चप्पल 🩴 | ८. बस्ता 🎒 | ९. साइकिल 🚲 | १०. घंटी 🔔
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‎रचनाकार - हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 
‎

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला-1)

‎
‎हेम के दोहे (बाल जनऊला-1)
‎
‎नाच नचावय अंगरी, बड़का हवय सुजान।
‎दुनिया भर के गोठ ला, पहुँचाय तोर कान।।
‎
‎संग दिखे अंजोर मा, फेर चलय ना साँस।
‎हाथ लगा आवय नहीं, अंधियार मा नास।।
‎
‎बिन संगी आधार ना, जोड़ी बिन बेकार।
‎पहरा देवय बैठ के, असली पहरेदार।।
‎
‎सूंघ-सूंघ पहिचान ले, पावय लाड दुलार।
‎चोर उचक्का देख के, ओला करय फरार।।
‎
‎एक गोल डिबिया धरय, बारहठन के अंग।
‎तीन सिपाही सँग चले, समय बतावय रंग।।
‎
‎पन्ना अपन समेट के, भर रखथे भंडार।
‎मोती दाना खोज के, मन के दीया बार।।
‎
‎अपन पसीना सींचथे, उठथे होत बिहान।
‎लावय हरियर सोनहा, कोन हरे पहिचान।।
‎
‎हरियर थाली ले भरे, पहिरय बाली सोन।
‎चार मुड़ा ले डाड़ हे, बता सखी ये कोन।।
‎
‎एक जगे दूजा सुते, अपन चढ़ावय रंग।
‎जिनगी के गाड़ी चले, रहय कभू ना संग।।
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‎नान्हे दाना पेट मा, धर रखथे जग छाँव।
‎बड़का हो फल-फूल दे, बूझव संगी नाँव।।
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‎उत्तर:-1. मोबाइल, 2. छइहाँ (परछाई), 3. तारा-कूची (ताला-चाबी), 4. कुकुर (कुत्ता), 5. घड़ी, 6. पोथी (किताब), 7. किसान, 8. खेती-खार (खेत-खलिहान), 9. दिन-रात, 10. बीजा (बीज)
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‎रचनाकार - हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 
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Wednesday, 17 June 2026

‎खेलँय संगी (चौपाई छंद)‎

‎खेलँय संगी (चौपाई छंद)
‎
‎खेलँय संगी बाँटी भौरा।
‎राउत पारा, दाऊ चौरा।।
‎
‎गोल गोल ले भौरा नाँचय।
‎देख देख के लइका हाँसय।।
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‎बगड़ू बल्ला खिंचे रस्सी।
‎कोन जीतथे रस्सा कस्सी।।
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‎देखय गंगा बंटी बल्लू।
‎बैठे तीर मा कुकुर कल्लू।।
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‎घाम चढ़े ले खेलँय फुगड़ी।
‎लइका सकलाइन बन जुगड़ी।।
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‎खेल कबड्डी पीटय ताली।
‎दाँव परे ले चिन्हा लाली।।
‎
‎संझा बेरा चोर-सिपाही।  
‎लुका-छुपी मा माजा आही।।
‎
‎खेल लंगड़ी अंधा कानी।
‎गाँव गली के खेल निशानी।।
‎
‎रेस टीप खेलँय पचरंगा।
‎ठप्पा बजा भाग ले गंगा।।
‎
‎घांदी मूंदी खेल सहेली।
‎खेल खेल मा पूछ पहेली।।
‎
‎खेलँय कोलाल धरे डंडा।
‎नवा-नवा खेले के फंडा।।
‎
‎खोखो खेलँय मन भर भागँय।
‎बइठे खड़े दाँव ला पालँय।। 
‎
‎डंडा मारय उड़थे गिल्ली । 
‎जइसे जाये जहाज दिल्ली।।
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‎सगली भदली खेल सजावँय।
‎पुतरी-पुतरा बिहा रचावँय।।
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‎मोबाइल के छोड़ खुमारी।
‎खेल बने असल संगवारी।।
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‎खेल खेल मा होवय योगा।
‎तन मन होवै पोठ निरोगा।।
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‎रचनाकार-हेमलाल साहू
‎गाँव - गिधवा, जिला -बेमेतरा 
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‎🐸 मेचका (बाल कविता)‎

‎🐸 मेचका (बाल कविता) ‎ ‎टप-टप बरसे सुग्घर पानी, ‎नान्हे मन ला भावय। ‎गात मया के गीत मेचका, ‎टर्र-टर्र ले टर्रावय।। ‎ ‎उत्ताधुर्रा जीभ लमावय...

सबले ज्यादा पढ़े गिस