Friday, 24 July 2026

🌼 हेम के दोहे (बाल जनऊला–8) 🌼

🌼 हेम के दोहे (बाल जनऊला–8) 🌼

❶
दुब्बर पतली कमरिया, तीखा ओकर धार।
लकर-धकर ले काट दे, ठाढ़े धान जुआर।।

❷
गोड़ हाथ अउ मुँह नहीं, बाँधे सौ-सौ गाँठ।
बइला बोझा खाट संग, गाढ़ा रहिथे साँठ।।

❸
तीन जीव के संग ले, चलथे एक्के ओर।
खरर-खरर ले जोत के, धरती सीना फोर।।

❹
पतली-पसली बाँस के, गूँथय गोल लपेट।
ऊपर ढक्कन दाब के, भीतर रखय समेट।।

❺
दूठन डंडा गोड़ जस, पइदान ले बनाय।
एक्को पाँव उठाय ना, सबला सरग चढ़ाय।।

❻
सौ-सौ दुवार एक घर, सबो रहँय परिवार।
फूलन रसा बटोर के, भरँय अपन भंडार।।

❼
बिन करघा बिन सूत के, गजबे कारीगार।
तिनका-पाना जोड़ के, बुन देवय घरबार।।

❽
डारा ऊपर बइठ के, बदलत रंग हजार।
फेंके झटले जीभिया, फटले धरे शिकार।।

❾
चोंचकु मुँह तन नानकुन, हिम्मत रखय अपार।
ठक-ठक रुख मा छेद कर, पावय अपन अहार।।

❿
बादर ले पानी गिरे, फुटथे छतरी तान।
ना बीजा रोपा लगे, करले तँय पहिचान।।

🌈 उत्तरमाला 🌈

❶ 🔪 हँसिया • ❷ 🪢 रस्सी • ❸ 🚜🐂 नागर (हल) • ❹ 🧺 झाँपी • ❺ 🪜 निसैनी (सीढ़ी) • ❻ 🐝🍯 मधुमक्खी के छत्ता • ❼ 🐦🪺 बया चिरई के घोंसला • ❽ 🦎 गिरगिट • ❾ 🐦🌳 कठखोलवा (कठफोड़वा) • ❿ 🍄 पिहरी (कुकुरमुत्ता)

✍️ रचनाकार – हेमलाल साहू
📍 चिरई के गाँव – गिधवा, जिला – बेमेतरा (छत्तीसगढ़)

Thursday, 25 June 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–7)

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–7)
‎
‎चौमासा किंजरत फिरे, पुसवा दुबके जाय।
‎आहट पावय ता खड़े, मुड़ी उठा फुसकाय।।
‎
‎माटी के तन पेट मा, आगी ला सुलगाय।
‎लकड़ी छेना डार ता, लपटा उप्पर जाय।।
‎
‎दू काया मुँह एकठन, दाना खावय नीस।
‎घर के कुरिया बैठ के, सबला घड़घड़ पीस।।
‎
‎शीशा के घर मा रहे, रतिहा कर उजियार।
‎जिनगी बाती-तेल हे, ओकर बिन अँधियार।।
‎
‎एक्ठो मुँह बिन दाँत के, दाना खाय हजार।
‎अपन पेट भर फेंकथे, सबला छाँट निमार।।
‎
‎पथरा ले पथरा दबा, मिरचा ला रोवाय।
‎लादा पोटा एक कर, सुघ्घर स्वाद बढ़ाय।।
‎
‎काया गहरा गोल हे, धरय धान भरमार।
‎थुथना-थुथना मार के, भूसा फेक उतार।।
‎
‎मगरा कस काया हवे, बइठे परछी पार।
‎दबक-दबक के पाँव ले, भूसा देय उतार।।
‎
‎बिन इंजन अउ तेल के, दू संगी ले जूर।
‎लकड़ी के काया बने, चलथे कोसो दूर।।
‎
‎लोहा के दाँता गड़ा, धरती छाती चीर।
‎रेंगय ओरी ओर ले, खींचे खड़ा लकीर।।
‎
‎
‎उत्तरमाला : 🐍 नाग (साँप) | 🔥 चूल्हा | ⚪ जाँता (हाथ चक्की) | 🏮 लालटेन | 🎋 सूपा (सूप) | 🪨 सिल-लोढ़ा (सिलबट्टा) | 🌾 ओखली (उखर) | 🌾 ढेंकी | 🐂 बैलगाड़ी | 🌾 नागर (हल)
‎
‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा

Wednesday, 24 June 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–6)‎

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला–6)
‎
‎सादा कपड़ा ओढ़ के, धरथे साधू भेस।
‎पानी भीतर झाँकके, झटले धर लीलेस।।
‎
‎गलती ला गप्पल जथे, कबो नहीं चिचियाय।
‎कागज उप्पर फेर दे, सबो साफ हो जाय।।
‎
‎घर के आगू ठाढ़ हे, चौड़ा सीना तान।
‎पहरा देवय रात दिन, का हे नाव सुजान।।
‎
‎सोना जइसन रंग हे, किसान रखय समेट।
‎पूजा करय किसान मन, भरथे कोठी पेट।।
‎
‎रतिहा परदा फार के, लावय नवा बिहान।
‎तोर बिना जग कुछु नहीं, बूझव नाव सियान।।
‎
‎पानी पीके जीय थे, बिन पानी अइलाय।
‎पटकू ला ओढ़े हरा, अँगना भर मुस्काय।।
‎
‎बड़े-बड़े ले मूछ हे, छोट जीव के काल।
‎दबके बइठे ताकथे, धीरज चतुरा चाल।।
‎
‎करिया काया नानकुन, चोककु लम्बा दाँत।
‎कुतर-कुतर के धान खा, ची-ची करथे बात।।
‎
‎लकड़ी रस्सी देह हे, एक चलय ना पाँव।
‎लेटत भर ले नींद दे, बूझव ओकर नाव।।
‎
‎नइ उड़य ओ अगास मा, फेर पाँख हे चार।
‎फरफर-फरफर घूम के, देय पसीना मार।।
‎
‎उत्तरमाला 
‎
‎🐦 कोकड़ा (बगुला) | ✏️ मेटली (रबर) | 🚪 कपाट (दरवाजा) | 🌾 धान | ☀️ सूरज | 🌱 पौधा | 🐱 बिलई (बिल्ली) | 🐭 मुसवा (चूहा) | 🛏️ खटिया(खाट)| 🌬️ पंखा
‎
‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
‎

Tuesday, 23 June 2026

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟‎

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला–5) 🌟
‎
‎कागज उप्पर नाचके, पोकय मस के लीक।
‎अपन पेट खाली करे, नाव बतालव ठीक।।
‎
‎हरियर लुगरा ओढ़ के, ठाड़े दिन अउ रात।
‎जेठ घाम मा छाँव दे, सबके करय सहात।।
‎
‎रतिहा फूलय डार मा, टप टप झरय बिहान।
‎महर महर ममहाय ले, दुरिहा ले पहिचान।।
‎
‎एक पेड़ सीधा खड़े, छूये जाय अगास।
‎दुब्बर पातर ये रहे, आवय कामें खास।।
‎
‎झब्बू पूँछ उठाय के, कूदय नाचय डार।
‎करिया धारी पीठ मा, करथे चिर्र-पुकार।।
‎
‎काया हरियर रंग के, टप-टप कूदत जाय।
‎पानी गिरथे सनसना, टरर-टरर नरियाय।।
‎
‎धरती भीतर घर करे, मुँह ऊपर हे खोल।
‎प्यासा आके तीर मा, पानी पाय अमोल।।
‎
‎काया हरियर लाल मुख, गुरतुर बोली बान।
‎मनखे जइसन गोठिया, बूझव नाम सुजान।।
‎
‎रंग बिरंगी पाँख ले, फूल फूल मंडराय।
‎रस चूसे मुँह नानकुन, घूम घूम इतराय।।
‎
‎पानी भीतर घर करे, बिन पानी मर जाय।
‎आँखी खोले रात दिन, पलक नहीं झपकाय।।
‎
‎उत्तरमाला : कलम 🖋️ | रुख (पेड़)🌳 | महुआ 🌼 | बाँस 🎋 | गिलहरी 🐿️ | मेचका (मेढ़क)🐸 | कुँआ 💧 | मिट्ठू (तोता)🦜 | तितली 🦋 | मछरी (मछली)🐟
‎
‎रचनाकार – हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा




Monday, 22 June 2026

हेम के दोहे (बाल जनऊला 4)

‎ हेम के दोहे (बाल जनऊला 4) 
‎
‎डेरा रहय अगास मा, पाँव बिना चल जाव।
‎काँवर मा पानी भरे, गाँव-गाँव बरसाव।।
‎
‎लेवय जनम पहाड़ मा, पालय पोसय गाँव।
‎भुइयाँ मा इतरात चल, सागर मा मिल जाव।।
‎
‎करिया टूरा नानकुन, पीसत चकना चूर।
‎नाक चढ़य ता छींक दे, महिमा हे भरपूर।।
‎
‎दाँत नहीं पर काट दे, झटकुन देवय फाँक।
‎दू पल्ला बिन सून हे, बूझव थोकुन झाँक।।
‎
‎दुब्बर पातर नानकुन, मुँह मा चोखा धार।
‎लकर धकर ले कूद के, कपड़ा कर तैयार।।
‎
‎रतिहा बुग-बुग ले बरय, रुख राई मा बास।
‎बिन बाती बिन तेल के, जगमग करथे खास।।
‎
‎करिया काया ला धरे, कउवा जस झन मान।
‎बइठे रुख के डार मा, गावय गुरतुर गान।।
‎
‎हीरा अउ मोती नहीं, भिनसरहा के हार।
‎माड़ा हरियर पान मा, फबथे बड़ सिंगार।।
‎
‎बिन आगी उठथे धुआँ, भिनसरहा ले छाय।
‎सुरुज ददा ला देख के, लटपट सरकत जाय।।
‎
‎माटी ले काया बनय, सुग्घर गोल मटोल।
‎सस्ता फ्रिज गरीब के, पानी रखय अमोल।।
‎
‎🌈 उत्तरमाला 🌈
‎
‎❶ बादर (बादल) ❷ नदिया (नदी) ❸ बटुरा मरिच(काली मिर्च) ❹ कैंची ❺ सुई ❻ जुगनू ❼ कोयल ❽शीत (ओस) ❾ कुहरा (कोहरा) ❿ करसा(मटका)
‎
रचनाकार – हेमलाल साहू
‎पक्षी विहार गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
‎

‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟‎

‎
‎🌟 हेम के दोहे (बाल जनऊला 3) 🌟
‎
‎❶
‎लुगरा हरा लपेट के, धरथे भीतर सोन।
‎मुड़ मा भुरवा बाल हे, बता सखी ये कोन।।
‎
‎❷
‎बाहर पथरा कस कड़ा, गूदा मीठ भराय।
‎डारा-डारा मा फरय, पक्का हर ममहाय।।
‎
‎❸
‎माटी भीतर जा घुसे, पहिरे भुरवा खोल।
‎घर ला फोरव ता मिले, बीजा गुरतुर गोल।।
‎
‎❹
‎उप्पर कपड़ा एकठन, भीतर परत हजार।
‎दूसर रोवय खुद कटे, देवय अब्बड़ झार।।
‎
‎❺
‎रहय सबो एकेच घर, अपन हाथ ला जोर।
‎खोल उतारय ता दिखे, सादा दाँत निपोर।।
‎
‎❻
‎काया रहिथे नानकुन, रेंगय बना कतार।
‎खाये बर कोठी भरय, जांगर खपय अपार।।
‎
‎❼
‎आठ पाँव धर काम ले, बुनय सुई बिन जाल।
‎दरजी मानय हार ला, अइसन करय कमाल।।
‎
‎❽
‎धरय पीठ घर लाद के, घूमय दिन अउ रात।
‎सुस्ता-सुस्ता रेंगथे, भावय बड़ बरसात।।
‎
‎❾
‎फूल-फूल रस बीनथे, कुरिया रखय लपेट।
‎गुरतुर धन भंडार रख, जग ला करदय भेंट।।
‎
‎❿
‎पहरा देवय रात के, घटय बढ़य हर रोज।
‎सुकवा संगे खेलथे, नाव हवय का खोज।।
‎
‎✨🌈 उत्तरमाला 🌈✨
‎❶🌽 भुट्टा(मकई)• ❷🍈 बेल (बेल फल)• ❸🥜 मूंगफली • ❹🧅 गोंदली(प्याज)• ❺🧄 लसुन(लहसुन )• ❻🐜 चांटी(चींटी)• ❼🕷️ मेकरा(मकड़ी)• ❽🐌 घोंघी-घोंघा • ❾🐝 मधुमक्खी • ❿🌙 चंदा(चांद)
‎
‎✍️ रचनाकार – हेमलाल साहू
‎🐦 🪺चिरई के गाँव – गिधवा, जिला बेमेतरा
‎
‎

Saturday, 20 June 2026

‎हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)

‎
‎हेम के दोहे (बाल जनऊला 2)
‎
‎रतिहा आवय काम मा, बटन मसक दे थोर।
‎रहिथे चुप अरझे परे, लावय बड़ अंजोर।।
‎
‎नान-नान धर दाँत मा, सुलझा देवय केस।
‎उलझन ला दुरिहा भगा, बूझव येकर भेस।।
‎
‎करिया काया ला धरे, पहिरे उप्पर कोट।
‎उज्जर पन्ना ला भरे, होवत जावय छोट।।
‎
‎मुड़ मा नाचे पाँव बिन, तन के तानय तार।
‎बरखा चाहे घाम हो, बन जावय रखवार।।
‎
‎झूठ कपट रखथे कहाँ, सच के देथे साथ।
‎जइसे ला तइसे दिखा, धरय जेन हा हाथ।।
‎
‎नान नान कड़गी जुरे, जेकर पाँव हजार।
‎कचरा दुश्मन तोर ये, खेदय घर के पार।।
‎
‎दून्नो संगी एक हो, जावय खेती खार।
‎काँटा खूँटी ले बचा, सेवा देय अपार।।
‎
‎पोथी कापी ला भरे, अपन पेट भंडार।
‎नोनी बाबू संग चल, बनके पक्का यार।।
‎
‎दूठन चक्का ले चले, कसरत के ये खेल।
‎पैसा हर बांचय घलो, अपन पाँव ले पेल।।
‎
‎नइहे मुँह ता बोलथे, निकले तोर पुकार।
‎टन-टन करके सोर दे, हो जावय तैयार।।
‎
‎उत्तर : १. बल्ब (बिजली बत्ती) 💡 | २. कंघी 🪮 | ३. पेंसिल ✏️ | ४. छाता ☂️ | ५. आईना (दर्पण) 🪞 | ६. झाड़ू 🧹 | ७. पनही-चप्पल 🩴 | ८. बस्ता 🎒 | ९. साइकिल 🚲 | १०. घंटी 🔔
‎
‎रचनाकार - हेमलाल साहू
‎चिरई के गाँव - गिधवा, जिला बेमेतरा 
‎

‎🐸 मेचका (बाल कविता)‎

‎🐸 मेचका (बाल कविता) ‎ ‎टप-टप बरसे सुग्घर पानी, ‎नान्हे मन ला भावय। ‎गात मया के गीत मेचका, ‎टर्र-टर्र ले टर्रावय।। ‎ ‎उत्ताधुर्रा जीभ लमावय...

सबले ज्यादा पढ़े गिस